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I- फांसी लगाकर कर दी गई थी 2012 में महिला की हत्या, कोर्ट ने 25-25 हजार का जुर्माना भी लगाया
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I- दहेज के लिए हत्या करना साबित नहीं हुआ कोर्ट में, अभियोजन ने हत्या को कोर्ट में कर दिया सिद्ध
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महिला के हत्यारे पति, देवर और सास को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। मुकदमा दहेज हत्या का दर्ज हुआ था लेकिन कोर्ट में दहेज की मांग सिद्ध नहीं हो पाई। हालांकि, अभियोजन इसे तमाम सुबूत और साक्ष्यों के दम पर हत्या सिद्ध करने में कामयाब रहा। सभी दोषियों को न्यायालय परिसर से हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।
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Iशासकीय अधिवक्ता जया ठाकुर ने बताया कि तीन मार्च 2012 को जोगेंद्र सिंह ने कोतवाली शहर में मुकदमा दर्ज कराया था। जोगेंद्र सिंह का कहना था कि उनकी बेटी गुरजीत कौर का विवाद पांच साल पहले गौरांश उनियाल के साथ हुआ था। दो मार्च 2012 को उनकी पत्नी को फोन आया कि गुरजीत कौर की तबीयत खराब है। यह सुनकर वह उसके ससुराल पहुंचे तो देखा कि गुरजीत बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसकी मृत्यु हो चुकी थी। जोंगेंद्र सिंह का आरोप था कि उनकी बेटी को उसके पति गौरांश उनियाल, देवर गौरव उनियाल और सास लक्ष्मी देवी निवासी खुड़बुड़ा मोहल्ला ने हत्या की है। इस आधार पर पुलिस ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था। इसकी जांच के बाद पुलिस ने दहेज हत्या और दहेज उत्पीड़न के आरोप में चार्जशीट अदालत में पेश की।
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Iन्यायालय में कुल 13 गवाह पेश किए गए। घटना के वक्त फोटोग्राफी हुई थी। बताया गया था कि गुरजीत कौर ने फांसी लगाकर जान दी है। मगर गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दहेज की मांग साबित नहीं हुई। लिहाजा, कोर्ट ने दहेज हत्या के दोष से सभी को दोषमुक्त कर दिया। हालांकि, अभियोजन इसे हत्या साबित करने में सफल हो गया। अभियोजन ने तर्क दिया कि जिस जगह फांसी लगी थी वह छत बेहद छोटी थी। इसके साथ ही गुरजीत का एक हाथ खराब था। वह उसे ऊपर नहीं उठा पाती थी। ऐसे में वह फांसी खुद नहीं लगा सकती है। यही नहीं उसके कपड़े फटे हुए थे। यदि वह फांसी लगाती तो उसके कपड़े कैसे फटते। इसमें एक और बात थी जिस चुन्नी से फांसी लगी वह फटी हुई थी। जबकि, फांसी लगाने की दशा में ऐसा संभव नहीं है। इस आधार पर षष्टम अपर जिला जज विक्रम की कोर्ट ने दोषियों को हत्या के दोष में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।I