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भूमाफिया की सांठगांठ : राजस्व अभिलेखागार से गायब हो गए जमीन के दस्तावेज

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राजस्व अभिलेखागार से 25 साल पुरानी जमीन के दस्तावेज गायब हो गए हैं। चंद्रबहादुर सिंह की अतिरिक्त भूमि को सरकारी स्वामित्व में लेने के बाद इसका कुछ हिस्सा किसानों को दिया गया था। एक किसान को भी इसमें हिस्सा मिला लेकिन कागज उन्हें नहीं मिले। अभिलेखागार में तलाश कराने पर पता चला, भूमाफिया ने सांठगांठ कर दस्तावेज गायब करा दिया है। अब डीएम ने प्रशासनिक जांच के बाद मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
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मौजा रैनापुर के प्रेमलाल ने डीएम सोनिका से शिकायत की थी कि वर्ष 1995-96 उन्हें सीलिंग की जमीन मिली थी। लेकिन, दस्तावेज नहीं मिलने से जमीन की पहचान नहीं हो पा रही है और न ही वह उस पर दावा कर पा रहे हैं। डीएम के आदेश पर राजस्व अभिलेखागार में जमीन के दस्तावेज तलाशे गए। कई महीने बाद भी दस्तावेज नहीं मिले तो राजस्व विभाग ने इसकी रिपोर्ट भेज दी। भूमाफिया की सांठगांठ से कई अन्य जमीनों के दस्तावेज पहले से ही नहीं मिलने पर इस मामले को भी भूमाफिया की कारगुजारी मानते हुए जांच बैठाई गई। एडीएम प्रशासन डॉ. एसके बरनवाल के नेतृत्व में जांच की गई। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा, जमीन के दस्तावेज न तो मौजा रैनापुर के बस्ते में पाए गए और न ही अन्य अभिलेखों में।

दस्तावेज न होना, मतलब खुर्द-बुर्द करने की तैयारी
यह मामला भी चाय बागान और सीलिंग से संबंधित है। चाय बागान और सीलिंग की काफी जमीनों के दस्तावेज गायब हैं। एडवोकेट विकेश नेगी के मुताबिक, ऐसे ही एक अन्य मामले में खरीद-फरोख्त पर रोक के बाद भी वर्ष 1988 में 35 बीघा जमीन की सेल डीड बना दी गई और भूमि का गैरकानूनी दाखिल खारिज 2020 में किया गया। सत्यापित दस्तावेज मांगे गए तो पता चला कि उपलब्ध ही नहीं है। नेगी के अनुसार, दस्तावेज न होने से साबित होता है कि यह भूमि सरकारी है और इसको खुर्द-बुर्द किया जा रहा है। मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
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सीलिंग की जमीनों पर भूमाफिया की नजर
सीलिंग में मिली जमीनों पर भूमाफिया की नजर है। इस संदर्भ में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर बताया जा चुका है कि राजा चंद्र बहादुर सिंह की जमीन सरप्लस लैंड है। उसे वर्ष 1960 में सरकार में निहित किया जाना था लेकिन कई गांवों में ऐसी जमीनों को भूमाफिया बेच रहे हैं। हाईकोर्ट इन जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा चुका है।
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जमीन के दस्तावेज तलाशे गए। नहीं मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है। मामले में जिसकी भी संलिप्तता पाई जाएगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. एसके बरनवाल, एडीएम (प्रशासन)
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