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लद्दाख स्काउट में भी दीं सेवाएं, कारगिल जिले में कोई पहली बार हुआ सेना में कमीशंड
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I भारतीय सेना के स्नो लेपर्ड के नाम से जानी जाने वाली लद्दाख स्काउट का सैनिक आईएमए में प्रशिक्षण के बाद अब अफसर बन गया। कारगिल जिले के छेरिंग अंगचुक के पिता खेती-किसानी से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अंगचुक कारगिल जिले के पहले ऐसे युवा हैं जो सेना में कमीशंड अफसर बने हैं।
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Iभारत-चीन सीमा पर हाड़ कंपा देनी वाली सर्दियों में जीवन यापन करने वाले इलाके से आने वाले छेरिंग अंगचुक चार भाई-बहन हैं। उनका परिवार का सिर्फ खेती किसानी ही नहीं बल्कि धर्म और सीमा की सुरक्षा से भी ताल्लुक है। अंगचुक के चाचा भी लद्दाख स्काउट का हिस्सा हैं। भारतीय सेना की लद्दाख स्काउट स्नो वॉरियर्स और स्नो लेपर्ड के नाम से जानी जाती है। कुछ साल पहले अंगचुक भी इसी रेजिमेंट का हिस्सा जवान के रूप में बने थे। बाद में एसीसी के माध्यम से उन्होंने अफसर बनने की ठान ली। तीन साल पहले छेरिंग अंगचुका का चयन देहरादून के आईएमए में हो गया।
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Iयहां पढ़ाई और एक साल के प्रशिक्षण के बाद अब वह सेना में बतौर अफसर अपनी सेवाएं देंगे। उनके परिजनों ने बताया कि कारगिल जिले से छेरिंग अंगचुक पहले ऐसे सैनिक हैं जो सेना में अफसर बने हैं। बता दें कि लद्दाख क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। इस क्षेत्र की रक्षा में लद्दाख स्काउट ही तैनात रहते हैं। ये उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लड़ाई में बेहद निपुण माने जाते हैं।I