पछवादून क्षेत्र में अहोई अष्टमी श्रद्धाभाव से मनाई गई। महिलाओं ने अहोई माता से संतान की दीर्घायु, आरोग्य और सुख और समृद्धि की कामना की। शाम को भगवान गणेश, माता पार्वती, शिव और अहोई माता को पकवानों का भोग लगाकर महिलाओं ने व्रत का पारायण किया।
रविवार को विकासनगर, सहसपुर, सेलाकुई क्षेत्र में महिलाओं ने पूरे दिन अहोई अष्टमी का निर्जल व्रत रखा। शाम अहोई माता की कथा सुनने के बाद व्रती महिलाओं ने सबसे पहले गणेश पूजन किया। उसके बाद अहोई माता ध्यान कर उनके चित्र पर दूध, शक्कर और चावल का भोग लगाया। व्रतियों ने माता का चांदी चित्र और दाने से पिरोई गई माला को अहोई माता को अर्पित किया। उसके बाद आकाश में चमकते तारों के दर्शन कर अर्घ्य देकर व्रत का पारायण किया। उसके बाद व्रती महिलाओं ने बच्चों और परिवार को चावल की खीर का प्रसाद दिया।
पंडित आचार्य सुनील पैन्यूली ने बताया कि अहोई का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखा जाता है। इस दिन संतानवती महिलाएं निर्जला व्रत रख संतान की दीर्घायु, सुख और समृद्धि की कामना करतीं है।