कथा व्यास आचार्य डॉ. विनीत वत्सल महाराज ने कहा कि भक्ति के धरातल पर कोई तर्क नहीं चलता। वहां पर तो सर्वांगीण समर्पण होता है। राम को पाने के लिए सरल बनना पड़ता है और सरल का सीधा से अर्थ राम-सीता और लक्ष्मण हैं। राम की चरणों की भक्ति जीवात्मा को निस्ताप और निष्पाप बनाती है।
शनिवार को श्री श्याम सुंदर मंदिर पटेल नगर में चल रहे 41वें मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के आठवें दिन राम कथा में कथा व्यास ने प्रवचन दिए। भरत चरित्र का जिक्र करते हुए महाराज ने कहा कि जब भरत राम को लाने के लिए चित्रकूट जा रहे होते हैं तो वह प्रयागराज में गंगा स्नान करते हैं। तीर्थराजप्रयाग उनसे कुछ मांगने को कहते हैं तो भरत भगवान राम को ही मांगते हैं। इससे जीव को प्रेरणा लेनी चाहिए कि भगवान के द्वार पर जाकर भगवान से सांसारिक वस्तु न मांगकर भगवान को ही पाने की इच्छा रखनी चाहिए।
सबरी चरित्र को सुनाते हुए नवधा भक्ति का वर्णन किया और भगवान को प्राप्त करने के नौ मार्ग बताए। मीडिया प्रभारी भूपेन्द्र चड्ढा ने बताया कि रविवार कथा सुबह दस से एक बजे तक चलेगी और इसके बाद भंडारे के साथ वार्षिक उत्सव समाप्त हो जाएगा। इस दौरान प्रधान अवतार मुनियाल, महामंत्री गोविंद मोहन, चंद्र मोहन आनंद, मनोज सूरी, प्रेम भाटिया, ओम प्रकाश सूरी, राजू गोलानी, गुलशन नंदा आदि मौजूद रहे।