पटेलनगर के श्री श्याम सुंदर मंदिर में 41वें मूर्ति स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ शुक्रवार को कलश यात्रा के साथ हो गया। कलश यात्रा में प्रभु श्रीराम के भजनों से वातावरण भक्तिमय हो गया। यहां शनिवार से श्रीराम कथा शुरू होगी।
शुक्रवार को मंदिर से 108 महिलाओं ने शामिल होकर मंगल कलश यात्रा निकाली। बैंड-बाजे के साथ सुंदर झांकी के पीछे भजन-कीर्तन करते हुए भक्त मंदिर की परिक्रमा करते हुए पुरानी चुंगी, शिव कॉलोनी, पूर्वी पटेलनगर, रामलीला ग्राउंड होते हुए मंदिर पहुंचे। इस दौरान भक्तों ने जगह-जगह कलश यात्रा का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। इस दौरान भजनों पर भक्त खूब झूमे। रामजी को मन में बसाए रखना.., अवध में आए हैं श्रीराम.., कीजो केसरी के लाल मेरा छोटा सा ये काम, मेरे रामजी से कह देना जय सिया राम... आदि भजनों ने भाव विभोर कर दिया।
मीडिया प्रभारी भूपेंद्र चड्ढा ने बताया कि मंदिर में शनिवार से शाम पांच बजे आचार्य विनीत डबराल श्रीराम कथा करेंगे। इस अवसर पर प्रधान अवतार मुनियाल, मनोज सूरी, यशपाल मग्गो, भजन गायक तेजेंद्र हरजाई, चंद्रमोहन आनंद, प्रेम भाटिया, कपिल गोगिया, ओम प्रकाश, गुलशन नंदा, विनोद कपूर, संजय मेहता मौजूद रहे।
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Iबैंड-बाजे के साथ निकाली कलश यात्रा
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खुड़बुड़ा के श्री ऋषि आश्रम मंदिर के वार्षिकोत्सव पर श्रीराम कथा का शुभारंभ किया गया। इस दौरान भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं कलश लेकर शामिल हुईं। महामंडलेश्वर स्वामी विद्या चेतन महाराज के मार्गदर्शन में कलश यात्रा निकाली गई। इसके बाद यात्रा आश्रम में पहुंचकर सम्पन्न हुई। जहां पवित्र ग्रंथ की आरती की गई। इसके बाद अयोध्या से आए आचार्य पुरुषोत्तम दास ने श्रीराम कथा शुरू की। उन्होंने पहले दिन कथा में भगवान श्रीराम नाम की महिमा का वर्णन किया। इस अवसर पर मुख्य यजमान रजनीश कुमार गुप्ता, समिति के अध्यक्ष महेश चंद गुप्ता, मनमोहन शर्मा, प्रवीण गुप्ता, यश गर्ग, सत्यप्रकाश गोयल मौजूद रहे।
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‘कभी चित तो कभी भक्तों का मन चुराते हैं ठाकुरजी’ I
देहरादून। भवन श्री कालिका माता समिति के तत्वावधान में बालयोगी सर्वदास महाराज के छठवें वार्षिक उपासना पर्व पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया। ब्रह्मचारी स्वामी नारायण चैतन्य ने कहा कि ठाकुरजी ने गोपियों के साथ द्वापर युग में रासलीला की थी, वह कलयुग में भी वही लीला रचते हैं। कहा कि भक्तों को आनंद प्रदान करने के लिए ठाकुरजी कभी चित चुराते हैं, कभी नवनीत चुराते हैं और कभी मन चुराते हैं।