क्या होता है जियोटेक्निकल सर्वेक्षण
धरती की सतह और कम गहराई में पाई जानी वाली मिट्टी और चट्टानों की जांच जियोटेक्निकल सर्वे में की जाएगी। इसमें विभिन्न तथ्यों जैसे उनका वास्तविक और आभासी घनत्व क्या है, इतने प्रतिशत रंध्रता (पोरोसिटी) है। रंध्रों में कितने एक-दूसरे से जुड़े हैं, जिसके कारण पानी धरती के भीतर प्रवाह करता है। मिट्टी और चट्टानों की भार वहन क्षमता कितनी है, कितना दबाव लगने पर वह टूटना शुरू करेंगी, टूटने पर उनका व्यवहार क्या होगा। अगर मिट्टी और चट्टान कमजोर हैं तो उन्हें किस प्रकार मजबूती दी जा सकती है। मिट्टी और चट्टानों का दबाव बढ़ने की अवस्था में अल्प और दीर्घकाल में किस तरह के परिवर्तन होंगे। भूकंप के प्रभावों को झेलने की क्षमता कितनी है। जैसे परीक्षण इस तकनीक में किए जाते हैं।
जोशीमठ की वर्तमान स्थिती को देखते हुए पूरे क्षेत्र का बहु-विविधता (मल्टी डिसीप्लीनरी) सर्वेक्षण आवश्यक है। इसमे भू विज्ञान जिओफिजीकल, हाइड्रोलॉजिकल, जियोडेटिक सर्वेक्षण, सुदर संवेदन का समावेश होना आवश्यक है। इन सर्वेक्षणों से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर काफी हद तक जोशीमठ में उपजे संकट का पता लगाने के साथ ही उनके निदान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
- डॉ. एके बियानी, भूगर्भशस्त्री, पूर्व एचओडी डिर्मामेंट ऑफ जियोलॉजी, डीबीएस पीजी कॉलेज
जोशीमठ में भू-धंसाव के अलावा पूरे क्षेत्र का जियोफिजिकल और जियोटेक्निकल सर्वे किया जाएगा। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी और आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों ने जियोफिजिकल सर्वे शुरू कर दिया है, जबकि राष्ट्रीय भू-भौतिकी अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) की टीम भी जोशीमठ पहुंच गई है। इसके अलावा जोशीमठ में भौगोलिक सर्वेक्षण पहले ही शुरू हो चुका है। इस सब कामों में अभी समय लगेगा। क्योंकि मिट्टी के नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। विश्लेषण के बाद ही डेटा तैयार हो पाएगा।
- डॉ. शांतनु सरकार, भू-विज्ञानी, उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएलएमएमसी)