ऐसे होगा प्लांट की क्षमता का निर्धारण
जिन आवासीय परियोजनाओं में 750-1000 वर्ग मीटर जगह होगी, वहां 50 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाना अनिवार्य होगा। 1500-2000 वर्ग मीटर जगह वाले परिसर में 100 किलोवाट, 3000-4000 वर्गमीटर में 200 किलोवाट का प्लांट लगाना होगा। प्रति किलोवाट का अनुमानित खर्च 50 हजार रुपये आएगा। 50 किलोवाट से 76,000 यूनिट, 100 किलोवाट से 1,52,000 और 200 किलोवाट से 3,04,000 यूनिट बिजली सालाना पैदा होगी। अधिक बिजली बनने पर यूपीसीएल बिजली की खरीद करेगा। सोलर प्लांट के लिए सहकारी बैंकों से आठ प्रतिशत ब्याज दर पर 15 साल की अवधि तक का ऋण मिलेगा। इसमें जमीन की सेल डीड, लीज डीड और लैंड यूज पर स्टांप ड्यूटी में छूट रहेगी। अगर कोई आवासीय परिसर 10 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाता है तो अधिकतम 2 साल में इसका पूरा खर्च निकल आएगा। आगे रोजाना 10 किलोवाट मुफ्त बिजली मिलेगी।
आरडब्ल्यूए को करना होगा कूड़े का निस्तारण
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बिल्डर एसोसिएशन से कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में आवासीय कॉलोनियों के परिसरों से निकलने वाले कूड़े का निस्तारण अपने स्तर पर करना होगा। अभी नगर निगम यह कार्य करता है। कहा, यह सुनिश्चित किया जाए कि आरडब्ल्यूए अपने स्तर पर प्लास्टिक, फल-सब्जी, कूड़े को अलग-अलग कर इससे खाद आदि बनाए। इससे नगर निगम को कूड़ा निस्तारण में आसानी होगी।
ये भी पढ़ें...Teachers' Day: बचपन में बड़े नटखट थे मंत्री जी...शिक्षकों की जुबानी उत्तराखंड सरकार के इन मंत्रियों की कहानी
ग्रीन एरिया बढ़ाएं
बैठक में बिल्डर एसोसिएशन से कहा गया कि आरडब्ल्यूए में ग्रीन एरिया से मतलब केवल घास उगाना नहीं है। ग्रीन एरिया में फलदार पेड़ों का रोपण किया जाए, जिससे आने वाले दिनों में शहर के बढ़ते हुए तापमान को नियंत्रित करने में मदद मिले।