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I- नगर निगम की ओर से जानकारी न देने से अधर में लटकी है जांच रिपोर्टI
एक माह से ज्यादा समय हो गया है लेकिन पार्षद स्वच्छता समितियों के माध्यम से हुए गड़बडझाला की जांच अधर में लटकी हुई है। इसका कारण नगर निगम की ओर से जांच समिति को जानकारी उपलब्ध न कराना है। समिति ने गायब मिले दो सौ कर्मचारियों के बारे में नगर स्वास्थ्य अधिकारी से जानकारी मांगी थी, लेकिन अभी तक वह जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाए हैं। ऐसे में जांच रिपोर्ट फाइनल होने में लगातार देरी हो रही है।
नगर निगम के पार्षद स्वच्छता समितियों में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया था। समिति के माध्यम से हर वार्ड में दस से 12 कर्मचारियों को रखा गया था। जिनको निगम की ओर से सीधे वेतन न देकर समिति के माध्यम से वेतन दिया जाता था। सौ वार्डों में करीब एक हजार के करीब कर्मचारी थे। नगर निगम का बोर्ड भंग होने पर जब प्रशासक जिलाधिकारी सोनिका ने कर्मचारियों का भौतिक सत्यापन किया तो करीब दो सौ कर्मचारी मौके से नदारद मिले। इनमें से एक नाम, पते के भी कई कर्मचारी मिले। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि नगर निगम की ओर से समितियों को तो प्रति कर्मचारी 15 हजार के हिसाब से वेतन दिया जा रहा था, लेकिन समिति की ओर से किसी कर्मचारी को दस तो किसी को और कम वेतन दिया जा रहा था। भौतिक सत्यापन में मिली गड़बड़ी के बाद जिलाधिकारी ने मामले की विस्तृत जांच के लिए सीडीओ झरना कमठान के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित की है। कमेठी को एक माह के अंदर जांच रिपोर्ट देने को कहा गया था। दो माह होने को है, अभी भी जांच अधर में लटकी हुई है।
Iनिगम का स्वास्थ्य अनुभाग नहीं दे रहा समिति को जानकारीI
समिति ने निगम के नगर स्वास्थ्य अनुभाग को ऐसे कर्मचारियों जो मौके पर नहीं थे और जिनके नाम से वेतन दिया जा रहा है, उनकी पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए निर्देश दिए थे। लेकिन निगम की ओर से आज तक इसकी जानकारी समिति को उपलब्ध नहीं कराई है। जांच समिति की माने तो 800 कर्मचारियों का भौतिक सत्यापन हो चुका है। 200 कर्मचारियों के बारे में नगर निगम से जानकारी मांगी गई है, लेकिन अभी तक इनकी जानकारी नहीं मिल पाई है।
I2018 तक खातों में दिया जाता था वेतनI
पार्षद स्वच्छता समितियां 2018 से पूर्व भी थीं, लेकिन समितियों के माध्यम से रखे कर्मचारियों को निगम डायरेक्ट खातों में वेतन देता था। 2018 के बाद बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित कर इन कर्मचारियों को समिति के माध्यम से दिए जाने निर्णय लिया गया। तब से निगम कर्मचारियों के खातों में वेतन देने के बजाय हर माह करोड़ों का भुगतान समिति को करती रही।
Iमामले में नगर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग से दो सौ कर्मचारियों, जिनका वेतन जाता था, उनकी जानकारी मांगी गई है। लेकिन अभी तक उन्हें यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। इससे जांच रिपोर्ट जारी करने में लगातार देरी हो रही है।
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I-झरना कमठान, सीडीओ, अध्यक्ष जांच कमेटी
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Iयह बात संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो नगर स्वास्थ्य अधिकारी से इस संबंध में बात की जाएगी। जांच समिति को जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है, इसके बारे में जवाब मांगा जाएगा।
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Iगौरव कुमार, नगर आयुक्तI