बिना वीजा नेपाल में घुसने के प्रयास के दौरान पकड़े गए इजरायली नागरिक के खिलाफ बुधवार को वीजा नियमों के उल्लंघन में 14 विदेशी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इसके बाद पुलिस ने उसे बुधवार को चंपावत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट धर्मेंद्र कुमार की अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में लोहाघाट के न्यायिक बंदीगृह भेज दिया गया है।
उत्तराखंड पुलिस ने मंगलवार को बिना वीजा नेपाल में घुसने का प्रयास कर रहे इजरायली नागरिक यानिव बेनिम को पकड़ा था। उसके पासपोर्ट में 25 अगस्त 2011 को तीन दिन का टीएलपी/ पीएलटी की स्टैंप मुंबई इमिग्रेशन सीएसआई एयरपोर्ट की लगी पाई गई है। उसके पास वीजा नहीं है।
इमिग्रेशन चेकपोस्ट अधिकारी इंद्र सिंह ने बताया कि यानिव बेनिम का पासपोर्ट इजरायल के रिशोन लिजोन से बना है, जिसकी वैधता अवधि वर्ष 2020 है। इस्रायली नागरिक को ड्रग ट्रैफिकिंग के मामले में वर्ष 2011 में सीबीआई द्वारा तीन दिन के लिए पेरू से भारत लाया गया था। वह पेरू जेल में भी रहा है। वह पांच माह के लिए पणजी जेल में भी रहा। इसके बाद सीबीआई कोर्ट द्वारा दोषमुक्त कर दिया गया। तब से वह बिना वीजा भारत में रह रहा है।
वहीं, गोवा थाने से पता करने पर ज्ञात हुआ कि उसके अलावा दो अन्य पर गोवा के थाना अंजुना में 25 अप्रैल 2019 को 326 / 34 आईपीसी में मुकदमा दर्ज है। तब से वह फरार चल रहा था। मंगलवार को वह भारत से नेपाल भागने की फिराक में था लेकिन बार्डर पर पकड़ा गया। कार्यवाहक थानाध्यक्ष देवेंद्र सिंह मनराल ने बताया कि इमिग्रेशन चेकपोस्ट अधिकारी और एसएसबी 57वीं वाहिनी ई कंपनी के कमांडर की तहरीर पर उसके खिलाफ 14 विदेशी अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।