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I- निगम ने 75 वार्डों में पूरा किया सत्यापन, 25 वार्डों में सत्यापन जारीI
नगर निगम की नई मोहल्ला स्वच्छता समितियों में गड़बड़झाला सामने आ रहा है। निवर्तमान पार्षदों ने जिन लोगों के नाम पर्यावरणमित्र के तौर पर दर्ज कराए थे, वे सत्यापन में मौके से नदारद मिल रहे हैं। मालूम हो कि इन लोगों को पार्षदों के अनुमोदन से 15 हजार रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जा रहा था। अब निगम प्रशासन इन्हें भुगतान कर रहा है।
नगर निगम की प्रशासक सोनिका ने वार्डों में पर्यावरणमित्रों के सत्यापन के निर्देश दिए हैं। उसके बाद अब सत्यापन के दौरान हर वार्ड में चार से पांच पर्यावरणमित्र नदारद मिल रहे हैं। वे नदारद हैं या उनके स्थान पर कोई दूसरा व्यक्ति काम करता पाया जा रहा है। मालूम हो कि निवर्तमान पार्षदों पर कई बार आरोप लगे कि उन्होंने पर्यावरणमित्रों के तौर पर अपने संबंधियों को नामित किया।
नगर निगम में मोहल्ला स्वच्छता की दो समितियां है। पुरानी वाली में करीब 600 पर्यावरणमित्र हैं। उनका भुगतान नगर निगम प्रशासन डीबीटी के माध्यम से कर रहा है। हालिया बोर्ड में वार्डों में नई स्वच्छता समितियां बनीं जिनमें लगभग 900 पर्यावरणमित्र बनाए गए। इन सभी कर्मचारियों को वेतन पार्षदों के माध्यम से दिया जाता रहा। बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई समितियों के पर्यावरणमित्रों के भुगतान की जिम्मेदारी निगम पर आ गई। अब प्रशासक के आदेश के बाद ऐसे नाम पकड़ में आ रहे हैं जो केवल कागजी तौर पर दर्ज होकर भुगतान ले रहे हैं।
Iमौके पर सत्यापित को ही मिलेगा वेतनI
नगर निगम की ओर से सत्यापन के बाद ही अब इन पर्यावरण मित्रों का वेतन जारी किया जाएगा। जो कर्मचारी मौके पर मिलेगा, उसी का वेतन जारी किया जाएगा। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बताया कि अभी तक 75 वार्डों में सत्यापन कार्य हो चुका है। 25 वार्डों में कार्य तेजी से जारी है। सत्यापन पूरा होने के बाद सत्यापितों को वेतन जारी किया जाएगा।
Iन तो पीएफ कट रहा न ईएसआईI
नई मोहल्ला स्वच्छता समिति के कर्मचारियों का न पीएफ कटता और न ईएसआई। हाल ही में राष्ट्रीय सफाई आयोग की अध्यक्ष ने इस बात को लेकर निगम के अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई थई। उन्होंने निगम के अधिकारियों को साफ-निर्देश दिए थे कि सभी कर्मचारियों का वेतन सीधे खातों में दिया जाए। साथ ही पीएफ और ईएसआई देने के भी निर्देश दिए थे।