जहां एक ओर सरकार हर घर शिक्षा का नारा देते हुए तमाम अभियान चला रही है, वहीं अधिकारी इन सभी अभियानों पर पलीता लगाने का काम कर रहे हैं। अधिकारियों की लापरवाही का उदाहरण राजधानी देहरादून के राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय रेस्ट कैंप के भवन की जर्जर हालत से लिया जा सकता है। जहां छात्र जान जोखिम में डालकर आखर ज्ञान लेने को मजबूर हो रहे हैं। स्कूल भवन की जर्जर हालत को लेकर उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है, लेकिन कोई भी मामले की गंभीरता समझने को तैयार नहीं है।
राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय रेस्ट कैंप में कक्षा छह से आठवीं तक 91 छात्र अध्ययनरत हैं। यहां दो कक्षा कक्षों की हालत इतनी खराब है कि कभी भी इनकी छत नीचे गिरकर एक बड़े हादसे को अंजाम दे सकती है। लगातार हो रही बारिश के कारण खतरा और बढ़ गया है, जिससे एहतियातन इन कक्षाओं को एक संस्था की ओर से संचालित दो कक्षों में चलाया जा रहा है। जबकि एक कक्षा प्राथमिक विद्यालय रेस्ट कैंप के भवन में संचालित हो रही है।
स्कूल के प्रधानाचार्य जिशान अहमद ने बताया कि उक्त जर्जर कक्षा कक्षों की मरम्मत की मांग को लेकर गत तीन जुलाई को समग्र शिक्षा अभियान के जिला परियोजना अधिकारी को पत्र लिखा था। उधर, मामले का संज्ञान लेते हुए नगर शिक्षा अधिकारी ने 13 जुलाई को जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखा। लेकिन, अभी तक किसी भी स्तर पर समस्या के निस्तारण को लेकर कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। मामला संज्ञान में है। पत्र मिलते ही निदेशालय को सूचित किया गया था। शासन की ओर से बजट जारी होते ही स्कूल भवन की मरम्मत कराई जाएगी।