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आर्थिक तंगी : इंद्रपाल अंतिम संस्कार के लिए न लकड़ी जुटा पाया न जरूरी सामान

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सहसपुर। होली पर जहां लोगों ने हजारों रुपये खर्च कर जश्न मनाया। वहीं दूसरी ओर इसी पर्व पर आर्थिक तंगी ने इंद्रपाल की दुनिया ही उजाड़ दी। बेबस इंद्रपाल की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वह अपनी पत्नी और मासूम बच्चों को ठीक से अंतिम विदाई तक नहीं दे पाया। हालांकि, इस बीच मित्र पुलिस ने अपना मानवता का धर्म निभाया और ग्रामीणों की मदद से महिला और उसके दो बच्चों का अंतिम संस्कार किया।
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इंद्रपाल के परिजन भी यह दुखदायी सूचना पाकर भदोही से देहरादून पहुंच चुके थे। उनकी संतुष्टि के लिए सरोजा और उसके दोनों बच्चों के शव दिखाए गए। उसके बाद होली के दिन बुधवार को शांति धाम विकासनगर में अंत्येष्टि के लिए तीनों शवों को लाया गया। यहां इंद्रपाल आंखों में आंसू लिए बेबस खड़ा हो गया। वहां न तो अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी थी और न ही अन्य सामान। पैसे न होने के कारण इंद्रपाल अपनी पत्नी और कलेजे के टुकड़ों के अंतिम संस्कार के लिए जरूरी सामान भी नहीं जुटा पाया था।
इंद्रपाल की बेबसी देख खाकी भी भावुक हो गई और ग्रामीणों की मदद से पुलिसकर्मियों ने शवों के अंतिम संस्कार की तैयारी की। जस्सोवाला ग्राम प्रधान प्रवीण सैनी ने बताया कि लकड़ी आदि के खर्च के लिए जिससे जितना हो सका मदद की और विधि विधान से शवों का अंतिम संस्कार कराया गया। जब इंद्रपाल अपने परिवार को मुखाग्नि दे रहा था, तब यह नजारा देख हर किसी की आंखों से आंसू छलक आए। अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों के विसर्जन के लिए इंद्रपाल परिजनों के साथ मूल गांव मिसराइनपुर, थाना दुर्गागंज, भदोही, उत्तर प्रदेश लौट गया।
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जहां बसाना चाहते थे नई दुनिया वहां लटक गया ताला
जस्सोवाला गांव में इंद्रपाल पत्नी और दोनों बच्चों के साथ रहता था। वह यहां एक निजी कंपनी में काम भी कर रहा था। साथ ही पत्नी भी एक स्कूल में बच्चों को पढ़ा रही थी। दोनों ने सपने देखे थे कि धीरे-धीरे अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेंगे और नई दुनिया बसाएंगे। हालांकि इंद्रपाल के जाने के बाद आज इस मकान में ताला लटक गया है। बता दें कि बीते सोमवार की रात को इंद्रपाल की पत्नी सरोजा (32) और दो बेटे अंश (12), शिवा (7) के शव घर के अंदर मिले थे। थानाध्यक्ष सहसपुर गिरीश नेगी ने बताया कि अब तक हुई जांच में यह बात पता चली है कि आर्थिक तंगी के चलते ही सरोजा ने बच्चों समेत खाने में जहर मिलाकर खा लिया था।


बीमारी के चलते छूट गई थी नौकरी
ग्राम प्रधान प्रवीण सैनी ने बताया कि इंद्रपाल बीमार रहता था। उसे सिरदर्द की शिकायत थी। इसी के चलते उसकी नौकरी भी छूट गई थी। करीब दो साल तक वह बेरोजगार रहा। इसी दौरान उसकी आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती चली गई। वह जस्सोवाला गांव का मूल निवासी नहीं था, जिस कारण उसे सरकारी योजनाओं का लाभ दिला पाना भी संभव नहीं था।





मेहनती है इंद्रपाल

कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट के इंद्रपाल चावला ने बताया कि इंद्रपाल मेहनती है। फिलहाल उसे ट्रायल के आधार पर रखा गया था। उसके काम को देखते हुए उसके जल्द पक्का होने की उम्मीद थी। घटना वाले दिन वह दिनभर ड्यूटी पर था। शाम साढ़े सात बजे छुट्टी होने पर ही कंपनी से घर के लिए निकला था। उधर, सरोजा के द हरबर्टपुर स्कूल की शिक्षिका शगुन ने बताया कि सरोजा ने दो महीने पहले ही स्कूल ज्वाइन किया था। वह अक्सर गुमसुम रहती थी। किसी से ज्यादा बोलती नहीं थी।


कोट::::
महिला के साथ ही दोनों बच्चों का विसरा सुरक्षित है। जांच के लिए लैब में भेजा दिया गया है। अभी तक हुई जांच में आत्महत्या की पुष्टि हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विसरा रिपोर्ट आने पर मौत का कारण स्पष्ट हो जाएगा। - गिरीश नेगी, थानाध्यक्ष सहसपुर
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