सार
देश के प्रथम गांव माणा में पत्थरों की मीनारों का अनोखा संसार दिखता है। भीम पुल से लेकर सतोपंथ मार्ग तक तीर्थयात्री एक-दूसरे को देखकर मीनारें बनाते हैं।पत्थरों की मीनारों के पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कारण भी छिपा है।
माणा गांव के ठीक सामने वसुधारा ट्रैक पर श्रद्धालु इस तरह रख रहे पत्थरों के ऊपर पत्थर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
देश के प्रथम गांव माणा में एक अनोखी परंपरा तीर्थयात्रियों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बदरीनाथ धाम के दर्शन के बाद माणा पहुंचने वाले श्रद्धालु यहां छोटे-छोटे पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर सजाकर मीनारें बना रहे हैं। भीम पुल से लेकर सतोपंथ मार्ग तक तमाम स्थानों पर पत्थरों की ये नन्ही मीनारें दिखाई देती हैं, जो इस क्षेत्र के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व की कहानी बयां करती हैं।
माणा गांव में पत्थरों की मीनार बनाने की परंपरा नई नहीं है। वर्षों से श्रद्धालु यहां अपनी आस्था और मनोकामनाओं के प्रतीक के रूप में पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर रखते आ रहे हैं। स्थानीय मान्यता है कि पवित्र भूमि पर पत्थरों की मीनार बनाने से घर में नए निर्माण, सुख-समृद्धि और शुभ कार्यों की कामना पूरी होती है। यही वजह है कि यहां आने वाला लगभग हर श्रद्धालु इस परंपरा का हिस्सा बन जाता है।
माणा निवासी धन सिंह घरिया बताते हैं कि अधिकांश श्रद्धालु दूसरों को ऐसा करते देखकर स्वयं भी पत्थरों की मीनार बनाने लगते हैं। कुछ लोग अपने परिवार की खुशहाली और नए घर के निर्माण की कामना करते हैं, जबकि कई श्रद्धालु अपने पितरों की स्मृति में भी पत्थरों की छोटी-छोटी संरचनाएं बनाते हैं।
पूर्व ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा के अनुसार, गांव के आराध्य देवता घंटाकर्ण भगवान की कृपा से नव निर्माण और मनोकामनाओं की पूर्ति होने की मान्यता है। इसी विश्वास के चलते लोगों ने पत्थरों को सजाने की शुरुआत की, जो समय के साथ एक लोकप्रिय परंपरा बन गई।