पार्षदों के भारी विरोध के कारण म्यूटेशन (दाखिल खारिज) और वसीयत के शुल्क में बढ़ोतरी फिलहाल टल गई है। बोर्ड ने इस मसले को समिति के हवाले कर दिया है। इसके साथ ही यूजर चार्जेज में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को भी बोर्ड से हरी झंडी नहीं मिल पाई। बैठक में स्ट्रीट लाइट और सफाई व्यवस्था को लेकर पार्षदों ने आक्रोश जताया।
शनिवार को मेयर सुनील उनियाल गामा की अध्यक्षता में हुई नगर निगम की बोर्ड बैठक में 18 प्रस्ताव रखे गए। सबसे महत्वपूर्ण म्यूटेशन और यूजर चार्जेज के शुल्क में बढ़ोतरी का प्रस्ताव था। म्यूटेशन का शुल्क 150 से बढ़ाकर पांच हजार रुपये करने का प्रस्ताव रखा था। शुल्क में भारी बढ़ोतरी का पार्षदों ने विरोध किया और इसे पांच हजार के बजाय दो हजार करने की मांग की।
शुल्क 1500 करने पर बैठक में सहमति भी बन गई थी, लेकिन जैसे ही आवासीय और व्यावसायिक भवनों के दाखिल खारिज की फीस का प्रस्ताव आया तो पार्षदों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कहा कि जनता पर एक साथ इतने बोझ डालना उचित नहीं है। इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष मेयर सुनील उनियाल ने दोनों प्रस्तावों के लिए समिति गठित करने के निर्देेश दिए।
उन्होंने कहा कि समिति की रिपोर्ट के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा यूजर चार्जेज के शुल्क में भी बढ़ोतरी के प्रस्ताव को भी फिलहाल टाल दिया गया है। म्यूटेशन शुल्क और यूजर चार्जेज अभी पहले की दरों से लिया जाएगा।
म्यूटेशन का शुल्क वर्ष 1999 में 150 रुपये निर्धारित किया गया था। वर्तमान में म्यूटेशन के लिए जो नोटिस डाक से भेजा जा रहा है, उसमें प्रति डाक 35 रुपये खर्चा होता है। विदेशों के लिए 90 रुपये प्रति डाक चुकाने पड़ते हैं। वर्तमान में म्यूटेशन के करीब पांच हजार केस आते हैं, जिनसे लगभग साढ़े सात लाख रुपये प्राप्त हो रहा है, जबकि खर्च एक करोड़ से अधिक होता है। साथ ही म्यूटेशन की कार्रवाई ऑनलाइन की जा रही है। इसमें भी काफी खर्चा आएगा। ऐेसे में शुल्क में बढ़ोतरी आवश्यक है। -मनुज गोयल, नगर आयुक्त
इन प्रस्तावों पर लगी मुहर
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