प्रदेश में केवल 18 फीसदी पुलिसकर्मियों के पास ही सरकारी आवास हैं। इसे जल्द ही 25 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस क्रम में 2000 आवासों का निर्माण किया जाना है, जिसके लिए 520 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। पुलिस का यह अहम प्रस्ताव शासन में विचाराधीन है।
प्रदेश में पुलिस के पास आवासीय और प्रशासनिक भवनों की बेहद कमी है। जिस जगह पर पुलिस का मुख्यालय है, वह कभी ओएनजीसी का अस्पताल हुआ करता था। यहां अधिकारियों तक के बैठने के लिए जगह नहीं बची है। इसी तरह थाने, चौकियों और पुलिसकर्मियों के आवास के निर्माण के लिए भी पुलिस लगातार जद्दोजहद कर रही है। पुलिस के पास आवास की उपलब्धता को आवास संतुष्टि स्तर से जाना जाता है। उत्तराखंड पुलिस का आवास संतुष्टि स्तर केवल 18 फीसदी है। जबकि, केंद्रीय बलों का आवास संतुष्टि स्तर 48 फीसदी है।
केंद्र सरकार ने इसे 2024 तक 78 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इसी तरह उत्तराखंड पुलिस को भी इसे बढ़ाने की जरूरत है। डीजीपी अशोक कुमार ने आवास निर्माण के प्रस्ताव पर भी जल्द विचार करने का आग्रह मुख्यमंत्री से किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में इस बजट की व्यवस्था के लिए हरियाणा राज्य की तरह हुडको जैसी वित्तीय संस्था से ऋण लेने का प्रस्ताव भी शासन के पास लंबित है।
200 आवास निर्माण का प्रस्ताव भी लंबित
पुलिस के लिए 200 आवासों के निर्माण का प्रस्ताव भी पिछले दिनों शासन को भेजा गया था। इन आवासीय भवनों के निर्माण पर 50 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। जबकि, 80 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 10 पुलिस थाने और 25 चौकियों के प्रशासनिक भवनों का निर्माण भी प्रस्तावित है।