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Iमहिलाओं ने चंद्रमा का अर्घ्य देकर किए पति की छवि के दर्शन
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Iपति के हाथ जल और भोजन किया ग्रहणI
पछवादून और जौनसार बावर क्षेत्र में सुहागिनों ने पूरे दिन करवा चौथ का निर्जल व्रत रखा। सुहागिन महिलाएं शाम ढलते ही बेसब्री से चांद के निकलने का इंतजार करती रहीं। शाम को जब 8.17 मिनट पर चांद निकला। महिलाओं की खुशी का ठिकाना न रहा। महिलाओं ने चांद को जल और गेहूं के दानों का अर्घ्य दिया और चौथ माता से पति की लंबी आयु की कामना की। छलनी की ओट से पहले चंद्रमा और फिर पति की छवि निहारी। उसके बाद पति के हाथ से जल और भोजन ग्रहण कर व्रत का परायण किया।
पिछले एक सप्ताह से महिलाएं सुहागिनों के सबसे बड़े पर्व करवा चौथ की तैयारियों में जुटी थी। आखिरकार वह खास दिन आ ही गया। बुधवार को चकराता, साहिया, कालसी, विकासनगर, सहसपुर, सेलाकुई क्षेत्र में महिलाओं में करवा चौथ के व्रत को लेकर खास उमंग रही।
महिलाएं सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ही उठ गईं। घर की साफ-सफाई और स्नान आदि के बाद चौथ माथा की पूजा कर निर्जल व्रत का संकल्प लिया। उसके बाद शाम को साड़ी या चुनरी के पल्लू में गेहूं के दाने बांधकर महिलाओं के साथ चौथ माता की कथा सुनीं। कथा सुनने के बाद ब्यूटी पार्लर पहुंची और सजने संवरने का दौर शुरू हुआ।
शाम को महिलाएं साज श्रृंगार कर घर पहुंची। घर पर चौथ माता और चंद्रमा को भोग लगाने के लिए पकवान और मिष्ठान आदि बनाए। चंद्रमा दिखने की बात सुनकर महिलाएं पति और परिवार के साथ घरों की छतों, आंगन और गैलरी आदि में पहुंची। सुहागिनों ने चांद को अर्घ्य देने के बाद पति के दर्शन कर व्रत का पारण किया। पति ने उपहार देकर अपने प्रेम का इजहार किया।