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Dehradun News: मोहनपुर प्रेमनगर सब-डिविजन में एक जेई के भरोसे 22 हजार उपभोक्ता

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Iकनेक्शन, बिलिंग आदि के लिए उपभोक्ताओं को उठानी पड़ती है परेशानीI
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ऊर्जा निगम के मोहनपुर प्रेमनगर सब-डिवीजन में 22 हजार उपभोक्ता मात्र एक जेई के भरोसे हैं। इससे उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन से लेकर मीटर लगवाने, पोल, लाइन शिफ्टिंग सहित कई परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। यहां जेई के दो पद स्वीकृत हैं, लेकिन उपभोक्ताओं की कई बार शिकायत और मांग के बाद भी यहां दूसरा जेई नहीं भेजा जा रहा है।

दरअसल, मोहनपुर डिवीजन के अंतर्गत पहले करीब चालीस हजार उपभोक्ता थे। काफी मांग के बाद ऊर्जा निगम ने मोहनपुर सब-डिवीजन को तोड़कर एक नया सब-डिवीजन गणेशपुर बना दिया। गणेशपुर को सब-डिवीजन बनाने के बाद से यहां एक जेई ही रह गया। जबकि अभी भी यहां उपभोक्ताओं की संख्या करीब 22 हजार है। पोल, लाइन शिफ्टिंग, गलत बिलों को ठीक करना, मीटर बदलना, कनेक्शन देने का काम जेई के जिम्मे होता है। डिवीजन में मात्र एक जेई होने के कारण लोगों को इन कार्यों के लिए जूझना पड़ता है। क्योंकि जेई को बिजली आपूर्ति की व्यवस्था भी देखनी पड़ती है। इसलिए जेई को ऑफिस के साथ ही फील्ड का काम भी देखना होता है। ऐसे में जेई के फील्ड में होने के कारण लोगों को अपने कार्यों के लिए बार-बार ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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Iसब डिवीजन के लिए दो जेई के पद स्वीकृत हैं। मुख्यालय को कई बार दूसरा जेई भेजने के लिए प्रस्ताव दिया जा चुका है, लेकिन अभी तक डिवीजन में एक ही जेई तैनात है। इस संबंध में दोबारा से मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। - मोहन मित्तल, अधिशासी अभियंता, मोहनपुर डिवीजन
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Iबिजली घर में अधिकतर कार्य ऐसे होते हैं, जो जेई के स्वीकृति के बाद भी होते हैं। डिवीजन में मात्र एक जेई होने के कारण लोगों को अपने कार्यों के लिए बार-बार ऑफिस के चक्कर काटने पड़ते हैं। कई बार इसकी शिकायत की गई लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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I- गीता बिष्ट, आरकेडिया
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Iएक जेई होने के कारण लोग बिजली कनेक्शन लेने, बिल ठीक कराने, मीटर लगाने आदि कार्यों के लिए परेशान होते हैं। जेई अधिकांश समय फील्ड में रहते हैं। ऐसे लोगों को जो काम एक दिन में होना चाहिए,वह हफ्तों और महीनों में होता है।
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Iचंद्रमोहन कोटनाला, मोहनपुर
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Iमोहनपुर सब-डिवीजन में लोगों को काफी परेशानी होती है। दो जेई हों, जिससे कि एक जेई फील्ड में रहें तो दूसरे ऑफिस में। ताकि लोगों को कार्यों के लिए न जूझना पड़े।
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Iचिंतामणि श्यामपुरI
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