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IMA POP 2023: देश-विदेश को अब तक मिल चुके 65,234 अफसर, इस साल ये युवा रहे सबसे अलग, बताई अपनी काबिलियत

Sat, 09 Dec 2023 11:42 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

भारतीय सैन्य अकादमी से हर साल सैकड़ों कैडेट पासआउट होकर सेना में अफसर बनते हैं। इनमें से कुछ ऐसे होते हैं जो अलग मुकाम हासिल करते हैं। उनकी मेहनत और काबिलियत उन्हें दूसरों से अलग करती है।
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आईएमए परेड में कैडेट्स - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के इतिहास में देश-विदेश की सेना को अब तक 65,234 युवा सैन्य अधिकारी देने का गौरव जुड़ गया है। इनमें 34 मित्र देशों की सेना के 2,914 सैन्य अधिकारी शामिल हैं, जबकि बाकी अफसर भारतीय सेना के हिस्सा बने हैं।

ये रहे पीओपी के सितारे

  • स्वॉर्ड ऑफ ऑनर, गौरव यादव, अवलर, राजस्थान
  • गोल्ड मेडल, गौरव यादव, अवलर, राजस्थान
  • सिल्वर मेडल, सौरभ बधानी, ग्वादम चमोली, उत्तराखंड
  • ब्रॉन्ज मेडल, आलोक सिंह, कानपुर, उत्तर प्रदेश
  • सिल्वर मेडल (टीजीसी), अजय पंत, रानीखेत अल्मोड़ा, उत्तराखंड

 

श्रेष्ठ विदेशी कैडेट, शैलेश भट्टा (नेपाल)

  • चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बैनर, कोहिमा कंपनी

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किस देश को मिले कितने अधिकारी

भारत-343, भूटान-9, मालद्वीव-4, श्रीलंका-4, मारीशस-3, नेपाल-2, म्यांमार-1, बांग्लादेश-1, तजाकिस्तान-1, उज्बेकिस्तान-1, सूडान-1, तुर्कमेस्तिान-1, किर्गिस्तान-1

पासआउट हुए मेडल विजेताओं ने बताईं अपनी काबिलियत

भारतीय सैन्य अकादमी से हर साल सैकड़ों कैडेट पासआउट होकर सेना में अफसर बनते हैं। इनमें से कुछ ऐसे होते हैं जो अलग मुकाम हासिल करते हैं। उनकी मेहनत और काबिलियत उन्हें दूसरों से अलग करती है। जिसका, उन्हें परेड के दौरान इनाम भी मिलता है। पीओपी के दौरान मेडल विजेता जेंटलमैन कैडेट्स से बातचीत के अंश...

किसान का बेटा बना स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और गोल्ड मेडल विजेता

कहते हैं अगर मन में कुछ कर गुजरने की चाहत हो तो कुछ भी असंभव नहीं है। यह कर दिखाया अलवर राजस्थान के गौरव यादव ने। गौरव यादव ने न केवल आईएमए का सबसे प्रतिष्ठित अवार्ड स्वॉर्ड ऑफ ऑनर पाया बल्कि गोल्ड मेडल विजेता भी रहे। गौरव सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता बलवंत सिंह यादव किसान हैं। मां कमलेश यादव गृहणी हैं। गौरव ने केरल पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की थी। उनके भाई विनीत कुमार सेना में नायक के पद पर कार्यरत हैं। गौरव का कहना है कि सेना में अफसर बनना उनका सपना था। इसके लिए उन्होंने जीतोड़ मेहनत की। उन्होंने पांच बार एनडीए की परीक्षा दी। चार बार वह असफल रहे लेकिन पांचवीं बार एनडीए पास किया। उन्हें एनडीए में प्रेसीडेंट गोल्ड मेडल मिला था। गौरव का कहना है कि अगर मन में जज्बा है तो कुछ भी असंभव नहीं है। उन्होंने कहा कि एक उपलब्धि मिल भी जाती है तो संतुष्ट नहीं होना चाहिए। दूसरी उपलब्धि के बारे में सोचना चाहिए।
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सौरभ ने चुनी परिवार से अलग सेना की राह, जीता सिल्वर मेडल

सिल्वर मेडल विजेता सौरव बधानी को ऑर्डर ऑफ मेरिट में दूसरा स्थान प्राप्त होने पर सिल्वर मेडल मिला है। उनके पिता हरिराम बधानी लोक निर्माण विभाग में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और मां दीपा देवी गृहणी है। भाई पंकज पंतनगर से बीटेक कर रहा है और दो बहनें हैं। जिनमें एक इंजीनियर व दूसरी मेडिकल फील्ड में तैनात है। सौरभ की प्रारंभिक शिक्षा स्कॉलर पब्लिक स्कूल से हुई। इसके बाद उनका चयन सैनिक स्कूल घोड़ाखाल के लिए हुआ। जहां से 12वीं पास करने के बाद खड़वासला स्थित एनडीए ज्वाइन किया। अब आईएमए से पास आउट होकर सेना में अफसर बन गया है। अपनी सफलता का श्रेय वह अपने परिवार को देते हैं।

आलोक ने तय किया सिपाही से अफसर तक का सफर

ऑर्डर ऑफ मेरिट में तीसरा स्थान प्राप्त करने पर आलोक सिंह को ब्रॉन्ज मेडल मिला है। वह उत्तर प्रदेश के कानपुर (नौबस्ता) के रहने वाले हैं। पिता कल्याण सिंह सेना से सूबेदार मेजर के पद से रिटायर हुए हैं, जबकि मां का कुछ साल पहले निधन हो गया। बड़े भाई अनूप एसबीआई में कार्यरत हैं। आलोक वर्ष 2014 में सेना में भर्ती हुए थे। उसके बाद एसीसी से माध्यम से उन्हें सेना में अफसर बनने का अवसर मिला। वह कहते हैं कि सफलता हासिल करने के लिए कठोर मेहनत जरूरी है।

अल्मोड़ा के अजय पंत ने कॉरपोरेट छोड़ सेना ज्वाइन की

अल्मोड़ा के अजय पंत को टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए सिल्वर मेडल मिला है। उनके पिता शिव प्रकाश पंत सेना से सूबेदार रैंक से रिटायर हुए हैं, जबकि मां दामिनी देवी गृहणी है। भाई अभय होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रहा है। आर्मी स्कूल सिकंदराबाद से शिक्षा प्राप्त करने के बाद अजय पंत ने कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया था और फिर डेढ़ साल तक ग्लोबल लॉजिक में नौकरी भी की। लेकिन, कॉरपोरेट की बजाय उन्होंने सेना को तरजीह दी। अब आईएमए से पास आउट होकर सैन्य अफसर बनने का उनका सपना पूरा हो गया है।
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