1932 में अस्तित्व में आया था आइएमए
बता दें कि आइएमए एक अक्टूबर 1932 को अस्तित्व में आया था। पिछले 91 वर्षों में अकादमी ने प्रशिक्षण क्षमता 40 से 1650 जैंटलमैन कैडेट तक बढ़ा दी है। अब तक 64,489 जैंटलमैन कैडेट्स अकादमी से पास आउट हुए हैं। इसमें 36 मित्र देशों के 2843 विदेशी कैडट्स भी शामिल हैं।
नहीं नजर आएगी घोड़ा-बग्घी
पासिंग आउट परेड में इस बार घोड़ा-बग्घी दिखाई नहीं देगी। अब तक निरीक्षण अधिकारी चार घोड़ों वाली बग्घी (पटियाला कोच) में परेड मैदान में पहुंचते थे। पटियाला के पूर्व महाराज ने यह बग्घी 1969 में आइएमए को भेंट की थी। इसके अलावा जयपुर के पूर्व महाराज की ओर से उपहार में दी गई जयपुर कोच, विक्टोरिया कोच व कमान्डेंट्स फ्लैग कोच भी चलन में रही हैै। लेकिन, अब रक्षा मंत्रालय के आदेश के तहत भारतीय सेना ने औपनिवेशिक प्रथाओं जैसे बग्घी, पाइप बैैंड आदि को समाप्त कर दिया है। इसलिए इस बार आइएमए पासिंग आउट परेड में घोड़ा बग्घी को शामिल नहीं करेगा।