सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित इकाईयों में पचास हजार से ज्यादा लोग सीधे तौर पर रोजगार से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा आसपास के ग्रामीण इलाकों के निवासियों को भी अलग-अलग तरह के रोजगार से जुड़ने का अवसर उद्योगों के कारण ही मिला हुआ है। जानकार लोगों की मानें तो यदि उद्योग बंद होते हैं तो लाखों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र से लेकर आसपास के इलाकों में छोटी-बड़ी लगभग चार सौ औद्योगिक इकाईयां संचालित की जा रही हैं। इनमें 50 से लेकर 200 तक कर्मचारी व प्रबंधन के क्षेत्र में पचास हजार के आसपास लोग नियमित रूप से रोजगार से जुड़े हैं। इन कर्मचारियों व प्रबंधन से संबंधित नौकरियों में लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं व युवा हैं। इसके अलावा उद्योगों के कारण सेलाकुई, रामपुर, शंकरपुर, सहसपुर तक के ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों को भी व्यापक स्तर पर रोजगार मिला हुआ है। बताते चलें कि क्षेत्र में दस हजार से अधिक परिवार किराये पर रहकर फैक्ट्रियों में नौकरी करते हैं, जिसके बदले वह अच्छी खासी रकम प्रत्येक माह अपने मकान मालिकों को प्रदान करते हैं। इसके साथ ही फल-सब्जी से लेकर जरूरत के अन्य सामान की दुकानों, ई रिक्शा, विक्रम आदि यातायात के संसाधन आदि के माध्यम से क्षेत्रवासियों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिला हुआ है। कुल मिलाकर यदि देखा जाए तो उद्योगों के संचालित होने से क्षेत्र में एक लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिला हुआ है। ड्रग मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद किलानी का कहना है कि उद्योगों के बंद होने से रोजगार की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। सरकार को आम जनमानस व उद्योगों से जुड़ी समस्या के मामले में तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए।