कोरोनाकाल में सरकारी अस्पतालों में ड्यूटी करने वाली बीएससी नर्सिंग अंतिम वर्ष की छात्राओं का कहना है कि चार माह बाद भी उन्हें मानदेय नहीं मिला है। प्रदेश में नर्सिंग की 200 से अधिक छात्राओं ने अस्पतालों में ड्यूटी की थी। नर्सिंग की छात्राएं अब मानदेय के लिए चिकित्सा शिक्षा निदेशालय व सीएमओ कार्यालय का चक्कर काट रही हैं। शनिवार को स्टेट कालेज ऑफ नर्सिंग की बीएससी नर्सिंग की छात्राएं चंदरनगर स्थित सीएमओ कार्यालय व चिकित्सा शिक्षा निदेशालय पहुंची। उन्होंने बताया कि नर्सिंग की अंतिम वर्ष की 47 छात्राओं ने कोविड ड्यूटी की थी। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में करीब एक माह तक उन्होंने जोखिम के बीच अस्पतालों में ड्यूटी की। उनका मानदेय प्रतिमाह 15 हजार रुपये निर्धारित किया गया था, लेकिन चार माह बीतने के बाद भी मानदेय नहीं दिया गया। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नर्सिंग की छात्राओं को मानदेय नहीं मिलने का मामला संज्ञान में है। मानदेय के लिए शासन से वार्ता की गई है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग छात्राओं को जल्द मानदेय दिया जाएगा। मा.सि.रि.