स्वामी रामदेव ने कहा कि स्वदेशी शिक्षा तंत्र का महर्षि दयानन्द, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी और सभी क्रांतिकारियों का सपना आजादी के 75 वर्ष बाद पतंजलि पूरा कर रहा है। देश स्वतंत्र हो गया लेकिन शिक्षा और चिकित्सा तंत्र अपना नहीं है। गुलामी की रस्मों एवं निशानियों को मिटाना है। यह कार्य संन्यासी ही कर सकते हैं।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि संन्यास मार्ग मोक्ष प्राप्ति का सरलतम साधन है। इस दौरान महिला मुख्य केन्द्रीय प्रभारी साध्वी देवप्रिया, आचार्यकुलम् की निदेशिका ऋतम्भरा शास्त्री, स्वामी विदेहदेव, स्वामी मित्रदेव, स्वामी ईशदेव, स्वामी सोमदेव, साध्वी देवश्रुति, साध्वी देववेरण्या, साध्वी देववाणी, साध्वी देवार्चना आदि उपस्थित रहे।