रेल के रूप में पहाड़ में आ रही लक्ष्मी
सतपाल महाराज ने कहा कि जौनसार बावर भी महाभारत की घटनाओं से आच्छादित क्षेत्र है। यहां लाक्षागृह के रूप में लाखामंडल का उल्लेख मिलता है। लाक्षागृह से बाहर आने के लिए पांडवों की ओर प्रयोग की गई सुरंग भी यहां है। लाखामंडल को भी महाभारत सर्किट में शामिल किया जाएगा। उन्होंंने कहा कि केंद्रीय रेल राज्य मंत्री थे तो उन्होंने पहाड़ तक रेल पहुंचाने की योजना बनाई थी। कहा कि आज ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना से पहाड़ तक रेल पहुंच रही है। कहा कि रेल के रूप में पहाड़ में लक्ष्मी आ रही है।
सतपाल महाराज ने कहा कि हमें पहाड़ के पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देना चाहिए। बताया कि जौनसार में पर्व पर बनाया जाने वाला असके पांडवों के समय का व्यंजन है। कहा कि हमें श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी असके परोसना चाहिए। झंगोरे की खीर को विशिष्ट व्यंजन के रूप में पहचान मिल रही। कहा कि लोग पहले मंडुवा नहीं खाते थे, बोलते थे यह काला अनाज है, लेकिन आज मंडुवा घर-घर में खाया जा रहा है। कहा कि पर्यटन को बढ़ाएं, अतिथि सत्कार को बढ़ाएं, यही हमारी पहचान है। कहा कि हमें आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। हमारे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कहते हैं कि अपने क्षेत्र का विकास करें। अंत में सतपाल महाराज ने कहा कि हनोल से कोई गंगा निकलनी चाहिए, मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।