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गुलदार की दहशत: भरतपुर के अंतिम परिवार ने भी छोड़ा गांव, रुला देगी इस गांव के लोगों की आपबीती

Wed, 31 Aug 2022 05:57 PM IST
रेनू सकलानी चैन सिंह रावत , संवाद न्यूज एजेंसी, सतपुली (पौड़ी)

सार

मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने की बात तो कही जाती है, लेकिन हकीकत यह है कि आए दिन गुलदार का निवाला बन रहे लोग अब हालात के आगे मजबूर हो गए हैं। ऐसे में अब अपना गांव छोड़ना ही वह उचित समझ रहे हैं। 
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गुलदार - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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गुलदार की दहशत से एक और गांव खाली हो गया है। भरतपुर के अंतिम परिवार ने भी गांव छोड़ दिया है। एक सप्ताह पहले भी दुगड्डा का गोदी बड़ी गांव पूरी तरह खोली हो चुका है। पोखड़ा और एकेश्वर विकासखंड के कई गांवों में पलायन का सिलसिला रुक नहीं रहा। पोखड़ा विकासखंड की मजगांव ग्राम पंचायत के गांव भरतपुर के लोगों ने गुलदार का निवाला बनने की बजाय घर छोड़ना ही बेहतर समझा।

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पोखड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत मजगांव में मजगांव, डबरा, सुदंरई, नौल्यूं, भरतपुर और चौबट्टाखाल बाजार का आशिंक क्षेत्र पड़ता है। चौबट्टाखाल बाजार में रह रहे पूर्व जिला पंचायत सदस्य और भरतपुर गांव के मूल निवासी प्रवेश सुंद्रियाल बताते हैं कि उनके बड़े भाई रमेश चंद्र सुंद्रियाल गुलदार के डर से परिवार समेत निकटवर्ती कसबे गवाणी में शिफ्ट हो गए हैं। गांव के रमाकांत सुंद्रियाल भी गांव से करीब 300 मीटर ऊपर सड़क पर नया मकान बनाकर रहने लगे हैं। गांव के दो परिवारों में से एक ने दिल्ली और दूसरे ने देहरादून का रुख कर लिया है।

ग्राम प्रधान मोनिका देवी, समाज सेवी सुधीर सुंद्रियाल का कहना है कि गुलदार दिन दहाड़े आ जाता है। क्षेत्र में कई घटनाओं के बाद जब वन विभाग और शासन प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया तो गांव वालों के लिए पलायन ही एकमात्र विकल्प बचा। उनका कहना है कि यहां के लोग पहाड़ में विषम हालात में रहने को तैयार हैं, लेकिन गुलदार ने उनका जीना दूभर कर दिया है। 

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बेटियां ननिहाल में पढ़ने को मजबूर
भरतपुर के समीपवर्ती डबरा गांव निवासी कांता प्रसाद ने अपनी दो बेटियों को गुलदार के डर से निकटवर्ती विद्यालय जूनियर हाईस्कूल चमनाऊ से हटाकर उनके ननिहाल पोखड़ा में शिफ्ट कर दिया है। बेटा जूनियर हाईस्कूल चमनाऊ में ही पढ़ रहा है। वह बताते हैं कि गुलदार के डर से रोज तीन किमी दूर पैदल बेटे को स्कूल छोड़ने और स्कूल से घर लाने के लिए वह स्वयं जाते हैं। इससे उनका रोजमर्रा की मजदूरी भी से प्रभावित हो रही है।

भरतपुर के चार परिवार अन्यत्र शिफ्ट हो गए हैं। क्षेत्र में गुलदार की खतरा बना हुआ है। विभाग की ओर से मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। -रुचि चौहान, रेंज अधिकारी दमदेवल, गढ़वाल वन प्रभाग।

पोखड़ा क्षेत्र में हुई गुलदार के हमले की घटनाएं 
10 जून 2021 को गोदांबरी देवी पत्नी ललिता प्रसाद ग्राम डबरा की गुलदार के हमले में मौत।
25 मई 2018 को पोखड़ा के सुंदरई (कोलखंडी) ग्राम सभा मजगांव, निवासी वीरेंद्र कुमार पुत्र कृपाराम (67) को मौत के घाट उतारा।
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गुलदार के हमले में घायल 
15 जुलाई 2019 को पोखड़ा के ग्राम खंदोरी निवासी युवक दिनेश सिंह हमले में घायल।
15 अक्टूबर 2019 को पोखड़ा के ग्राम कस्याणी में चार वर्षीय बच्चे शिवम पर घर में हमला।
16 दिसंबर 2019 को पोखड़ा के बगड़ीगाड में युवक साहिल पुत्र कैलाश चन्द्र पर हमला।
18 मार्च 2020 को पोखड़ा के गवाणी गांव के अनिल सिंह पुत्र आनंद सिंह पर हमला।
18 जुलाई 2020 पोखड़ा के थापला में घर के आंगन में बैठी किशोरी अनामिका पर हमला। 
6 मार्च 2021 को पोखड़ा के कुई गांव निवासी कांति देवी पत्नी विनोद कुमार पर हमला। 
22 मई 21 को पोखड़ा के खेतों में काम कर रही सुन्दरई गांव की जयेश्वरी देवी पर हमला। 
9 जून 2021 को पोखड़ा के गवाणी गांव के निकट नेपाली मजदूर पर हमला कर उसे दौड़ाया।
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