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Dehradun News: देश के लिए हरित ऊर्जा भविष्य की जरूरत

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उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) में चल रहे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महोत्सव के दूसरे दिन ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए हरित ऊर्जा का महत्व बताया। विशेषज्ञों के मुताबिक, देश के लिए हरित ऊर्जा भविष्य की जरूरत है।
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महोत्सव के दूसरे दिन कृषि सम्मेलन, विज्ञान प्रश्नोत्तरी और ऊर्जा संरक्षण पर ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव आयोजित किया गया, जिसमें सीआईआई, उरेडा, पावर कॉरपोरेशन और ओएनजीसी के विशेषज्ञों ने कई कॉलेजों से आए शोधार्थियों को हरित ऊर्जा के बारे में जानकारी दी। यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रोफेसर दुर्गेश पंत ने जल, ऊर्जा संरक्षण के साथ परिषद में सौर पैनल की स्थापना का महत्व बताया। डॉ. रीमा पंत ने कहा कि हरित ऊर्जा भविष्य की जरूरत है। पर्यावरण संरक्षण के लिए ई-कचरे और प्लास्टिक को रिसाइकिल करने की जरूरत है। सोनिया गर्ग ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक वाहनों से पर्यावरण प्रदूषण को कम सकते हैं। स्थानीय कच्चे माल से स्वदेशी उत्पाद बनाने की जरूरत है।
यूपीसीएल के पूर्व एमडी बीसीके मिश्रा ने कहा कि कार्बन फुटप्रिंट कम के लिए प्रयास होने चाहिए। यूजेवीएनएल से संदीप सिंह ने कहा कि उत्तराखंड में जलविद्युत उत्पादन के लिए संसाधनों की कमी नहीं है। इन परियोजनाओं के संचालन की व्यवहारिकता पर ध्यान देना होगा। उत्तराखंड पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. एस. राय ने ऊर्जा, उत्पादन और खपत पर कहा कि ऊर्जा की बचत एक तरीके से ऊर्जा का उत्पादन ही है। महोत्सव में 1500 से अधिक छात्रों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। कृषि सम्मेलन में सगंध पौध केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. नृपेंद्र चौहान ने एरोमा खेती और उत्पादों के बारे में जानकारी दी। रूपा सोनी ने कहा कि पहाड़ी अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का विशेष महत्व है।
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