तहसील प्रशासन ने लिया फैसला, कई मकान भी खतरे की जद में
प्राथमिक विद्यालय खमरौली गिरने की स्थिति में
विकास खंड कालसी के खमरौली गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय को गांव के पोलिंग स्टेशन की सूची से हटा दिया गया है। भू-धंसाव की जद में आए विद्यालय की स्थिति का आकलन करने के बाद तहसील प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। भू-धंसाव के कारण गांव के 23 परिवार खतरे की जद में हैं।
अगस्त के महीने में जौनसार बावर क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण ग्राम खमरौली में 23 मकानों के अलावा एक राजकीय प्राथमिक विद्यालय व गांव का शिव मंदिर भू-धंसाव की जद में आ गए थे। जिसके चलते विद्यालय से सभी बच्चों को एक निजी मकान में शिफ्ट करने के साथ ही कई घरों को खाली भी कराया गया था।
उधर तहसील प्रशासन के माध्यम से लगातार किए जा रहे गांव के निरीक्षण के बाद राजकीय प्राथमिक विद्यालय को आने वाले किसी भी चुनाव के लिए पोलिंग स्टेशन नहीं बनाने का निर्णय लिया गया है। उप जिलाधिकारी युक्ता मिश्र ने बताया कि विद्यालय का भवन भू-धंसाव के कारण पूरी तरह जर्जर हो चुका है। कभी भी भवन गिर सकता है। इसलिए भवन को ठीक कराए जाने तक पोलिंग स्टेशन को किसी दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने का फैसला किया गया है। इसके अलावा गांव में भू-धंसाव के कारण पैदा हो रही स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।
23 परिवारों पर मंडरा रहा खतरा
भू-धंसाव के कारण गांव में निवास करने वाले कुल 60 परिवारों में से 23 परिवार खतरे की जद में हैं। मकान व घरों के आगे बने आंगन पूरी तरह गिरासू स्थित में हैं। जिसके चलते ग्रामीण भय के वातावरण में जी रहे हैं। ग्रामीण ज्ञान सिंह तोमर, भगत सिंह तोमर, अमर सिंह तोमर, नाथु सिंह तोमर का कहना है कि सरकार से लगातार सुरक्षात्मक कार्यों को शुरू करने की अपील की जा रही है लेकिन अभी तक इस तरफ सरकार का ध्यान नहीं है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि गांव को छोड़ देने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है।
2013-14 में आई थी दरारें
खमरोली गांव में घरों के आगे बने आंगन में 2013-14 में दरारें दिखाई देना शुरू हो गई थी। बताया जा रहा है कि गांव के ठीक नीचे सड़क निर्माण के लिए की गई पहाड़ों की कटिंग ने गांव की मिट्टी को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचाया जिससे इस प्रकार की स्थिति पैदा हुई है। बताते चलें कि तत्कालीन सरकार के मंत्री खजानदास ने उस समय गांव का निरीक्षण करके स्थिति को सुधारने के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं की थीं लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उनकी घोषणा पर कोई काम गांव में नहीं हुआ।