ये जनाब कहने को विधायक हैं, लेकिन राजनीति क्षेत्र की जगह नगर-निगम की ही करते हैं। जब तक महाशय पहुंच नहीं जाते, समर्थक नारेबाजी तक शुरू नहीं करते।
न जाने कितना पानी बह जाएगा
विधायक जी के मुताबिक यह भी अपनी ही जनता है, इसलिए इनके लिए सोचना फर्ज बनता है, लेकिन जिस क्षेत्र की जनता ने वाकई वोट दिया है, उनके लिए कब सोचेंगे विधायक जी यह किसी को मालूम नहीं। यूं भी अभी तक साल भर ही हुआ है चुनाव को। चार साल में तो दरिया में न जाने कितना पानी बह जाएगा।