देहरादून के एक नामी कॉलेज में इन दिनों दो गुट सक्रिय हैं।
चेले टाइप शिक्षक
एक तरफ पुराने शिक्षक हैं, जिन्हें अपने तजुर्बे पर बड़ा गुमान है तो दूसरी ओर कॉलेज के प्रमुख पद पर तैनात अधिकारी के साथ उनके कुछ नए चेले टाइप शिक्षक।
कॉलेज की किसी भी समस्या में यह अधिकारी तजुर्बेकार शिक्षकों की राय के बजाए चार पांच साल पुराने शिक्षकों के साथ रायशुमारी करते हैं।
ऐसी स्थिति में तजुर्बेकार शिक्षक दूर रहते हैं। एक गुरुजी तो खुलेआम कहते हुए घूमते हैं, जिन्हें हमने पढ़ाकर मास्टर बनने लायक बनाया, वही आज हमारे के लिए रास्ता तैयार करवाते हैं। यानी चेले, गुरु के दुश्मन निकले।