देहरादून में एक छात्र संगठन वैसे तो अपनी अलग पहचान रखता है। अलग नाम पर ही कॉलेजों में चुनाव लड़वाता है।
कोई पार्टीबाजी का आरोप लगाए तो साफ तौर पर अपनी अलग पहचान की गवाही देता है। लेकिन इन दिनों चल रहे एक बड़े संगठन के चुनाव पर इनकी बारीक नजर हैं।
यहां तक की अपने पूर्व अध्यक्ष को ही सीधे चुनाव में खड़ा कर दिया। अब उक्त संगठन के पदाधिकारी इनसे कुढ़ रहे हैं। कुछ लोगों के सामने तो बोल भी देते हैं, यार क्या अलग पहचान। आएंगे तो हमारे ही संगठन में। बेचारी अलग पहचान वाले, करें भी तो क्या?