इन दिनों उत्तराखंड में अवैध खनन का मामला जोर पकड़े हुए है। एक विभागीय अधिकारी सहमे हुए हैं, लेकिन कागजात उन्होंने पूरे तैयार कर लिए हैं।
आला अफसरों को सब पता है
जैसे ही शासन के किसी अफसर की कॉल आती है वे सामने टेबल पर शीशे से दबे कागज के आंकड़े फोन पर फर्राटे से पढ़ने लगते हैं।
फोन कटते ही लंबी गहरी सांस लेते हैं। कहते हैं कि आला अफसरों में सबको पता है कि कहां-क्या हो रहा है? ज्यादा तेजी दिखाने लगेंगे तो कुर्सी चली जाएगी। खनन करने वाले नेताजी के चेले हैं।
जिस दिन तेजी दिखाई उसी के अगले दिन कुर्सी गई। जब सब इसी में लगे हैं तो वह क्यों अपनी बलि दें?