पुलिस पूछताछ में आरोपी प्रेमपाल ने बताया कि बागेश्वर में मजदूरी करने के दौरान ममता नाम की महिला से उसका प्रेम प्रसंग हो गया था। गीता को इसकी जानकारी हो गई थी। इस बात पर दोनों में अनबन रहने लगी। वह गीता से पीछा छुड़ाना चाहता था, इसलिए 21 सितंबर की रात को उसने गीता के साथ कमरे में शराब पी। गीता को नशा अधिक होने पर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या करने के बाद वह अपने दोस्त सुरेंद्र पाल निवासी जादौपुर, थाना शहजादनगर रामपुर (यूपी) एवं हाल निवासी विवेकनगर ट्रांजिट कैंप के कमरे पर गया। दोनों ने मिलकर शव को काटकर नाले में ठिकाने लगाने की योजना बनाई।
सुरेंद्र पाल ने प्रेमपाल से इस काम के बदले 30 हजार रुपये की मांग की। 20 हजार रुपये में सुरेंद्र मान गया तो प्रेमपाल ने उसे दो हजार रुपये एडवांस में दे दिए। 22 सितंबर को दिन में दोनों बाजार से एक चापड़, काली पन्नी और प्लास्टिक के कट्टे ले आए। दिन में दोनों ने शराब पी और शाम को शव के तीन टुकड़े कर कट्टे में भर लिया। इसी बीच कमरे से काटने की आवाज और बाहर खून निकलता देखकर पड़ोसियों ने शोर मचा दिया। सुरेंद्र शव ले जाने के लिए बाइक लाने गया था। शोर सुनकर प्रेमपाल मौके से फरार गया। भीड़ ने आरोपी प्रेमपाल का पीछा किया लेकिन वह भागने में कामयाब रहा।
हत्यारे प्रेमपाल पर हैं छह मुकदमे
हत्या के आरोपी प्रेमपाल पर चोरी के आधा दर्जन मुकदमे हैं। इनमें से पांच ट्रांजिट कैंप थाना क्षेत्र में दर्ज हैं जबकि एक मुकदमा रुद्रपुर में दर्ज है। पुलिस ने बताया कि सुरेंद्र पाल के खिलाफ फिलहाल कोई मुकदमा दर्ज नहीं मिला है। आरोपी सुरेंद्र को पुलिस ने ट्रांजिट कैंप के विवेकनगर स्थित कमरे से गिरफ्तार किया था। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह प्रेमपाल के साथ काम पर जाता था। इस कारण दोनों की अच्छी पहचान थी।