क्षेत्रीय विकास निगरानी समिति ने पर्यटक स्थल टाइगर फाॅल झरने के आसपास के क्षेत्र की जांच भू-वैज्ञानिकों से कराए जाने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र में विकसित हो रहे होटल, रेस्टोरेंट व होम स्टे आदि के लिए गैरकानूनी ढंग से जेसीबी चलाकर रास्ते बनाने व पहाड़ों को काटकर जमीन समतल करने की कार्रवाई पर भी रोक लगाने की मांग की है।टाइगर फॉल में 26 मई को एक वृक्ष के उखड़कर गिर जाने से दिल्ली की एक महिला पर्यटक व एक ग्रामीण की मौत हो गई थी। जिसके बाद जिला पर्यटन विभाग ने वन, राजस्व व पुलिस विभाग के साथ टाइगर फॉल विकास समिति की एक संयुक्त टीम बनाकर जांच की थी। जांच में टाइगर फॉल के ऊपरी हिस्से में खड़े 17 वृक्षों को खतरनाक मानते हुए उन्हें काटे जाने की कार्रवाई प्रारंभ कराने की बात कही थी। इस मामले में क्षेत्रीय विकास निगरानी समिति ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले टाइगर फॉल क्षेत्र की जांच भू-वैज्ञानिकों से कराने की मांग की है। समिति के मुख्य सलाहकार सेवानिवृत कैप्टन चेतन चौहान, सचिव सुरेंद्र सिंह रावत, अजब सिंह, सूरज प्रकाश, सुरेश चौहान, महाबल नेगी आदि ने पत्र में कहा है कि बिना भू-वैज्ञानिकों की जांच के बिना वृक्षों का पातन किया जाना आपदा को निमंत्रण देना है। उन्होंने कहा कि वृक्षों को काटने से भूमि पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इससे भू-स्खलन का खतरा तो नहीं बढ़ जाएगा जैसे बिंदुओं को परखा जाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने टाइगर फॉल क्षेत्र में निजी रास्ते बनाने व पहाड़ों को काटकर समतल करने के लिए आए दिन चलाई जा रही जेसीबी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग भी जिलाधिकारी से की है।