एक निजी विवि की प्रोफेसर समेत तीन लोगों को साइबर ठगों ने ठग लिया। सभी से लगभग चार लाख रुपये की ठगी की गई। इनमें किसी को ऑनलाइन टास्क दिया गया तो कोई लोन जमा कराने के चक्कर में फंस गया। तीनों मामलों में पुलिस ने मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ठगी : एक
पहले दिया लाभ फिर बंद कर लिया नंबर
पटेलनगर थाने में तबिश खान निवासी कन्हैया विहार ने शिकायत दी। बताया कि उन्होंने पिछले साल नवंबर में यूट्यूब पर एक ऑनलाइन एआई कंपनी के बारे में देखा था। यह कंपनी किराये पर इंटरनेट सर्वर देती थी। इसके लिए उन्होंने 800 रुपये का निवेश कराया। कंपनी ने व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा और फिर बाद में टेलीग्राम ग्रुप पर जोड़ लिया। इसकी एडमिन लौरा क्लार्क से भी लगातार बात होती रहती थी। एप पर प्रति टास्क के लिए रकम जमा कराई जाती थी। इसका लाभ वॉलेट में भी दिखता था और बहुत सा पैसा निकल भी जाता था। उन्होंने विभिन्न टास्क के लिए 2.83 लाख रुपये जमा कर दिए। इसमें से तबिश ने 1.28 लाख रुपये निकाल भी लिए, लेकिन 1.55 लाख रुपये बचे हैं, जिसे वह निकाल नहीं पा रहे हैं। अब पता चला कि उनके साथ ठगी हुई है।
ठगी : दो
लोन जमा करने के चक्कर में गंवाए 1.47 लाख रुपये
जगजीत कौर निवासी प्रेमनगर ने किस्त एप से 1.90 लाख रुपये लोन लिया था। इसकी उन्होंने छह किस्तें जमा कर दीं। सातवीं में उन्होंने लोन को बंद कराने की योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने एप पर फोरक्लोज यानी समय से पहले पूरा लोन जमा करने के लिए ई-मेल किया। गत आठ अप्रैल को उन्हें एक फोन आया। खुद का नाम पंकज योगी बताते हुए कहा वह एप का टीम लीडर है। उन्होंने बची हुई राशि बताए गए बैंक खाते में जमा कर दी। उन्होंने कुल 1.47 लाख रुपये जमा किए, लेकिन उन्हें बताया गया कि उनका लोन जमा नहीं हुआ है। प्रेमनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
ग्राफिक एरा विवि की प्रोफेसर से 90 हजार रुपये ठगे
एसओ प्रेमनगर गिरीश नेगी ने बताया कि डॉ. शालिनी अग्रवाल निवासी जलवायु टावर झाझरा ने शिकायत की है। बताया कि वह ग्राफिक एरा हिल विवि की नियमित प्राध्यापक हैं। उनका एचडीएफसी बैंक टर्नर रोड में खाता है। बैंककर्मी काजल ने क्रेडिट कार्ड निशुल्क बनवाने का प्रस्ताव दिया। 15 मार्च को क्रेडिट कार्ड आवास पर आ गया। इसके बाद बैंक के क्रेडिट कार्ड विभाग से फोन आने शुरू हुए। खुद को बैंककर्मी बताते हुए पूछा गया था कि क्रेडिट कार्ड की लिमिट 92 हजार करवाते हैं तो वार्षिक बैंक के क्रेडिट कार्ड चार्जेस नहीं देने होंगे। एक वेबसाइट पर जाकर क्रेडिट कार्ड लिमिट सेट करने के लिए कहा। बताये मुताबिक करने पर ओटीपी मिला। इसके तुरंत बाद एक फोन आया और वेबसाइट पर ओटीपी इंटर करवाया। इसके बाद क्रेडिट कार्ड की देनदारी 91 हजार रुपये बताई गई। जबकि, उन्होंने 1,270 रुपये की ही खरीदारी की थी। बैंक से जानकारी करने पर पता चला कि 90 की खरीदारी मैसर्स राज खाता बुक मुंबई इंडिया के खाते में की गयी है। आरोप है कि बैंक से सूचनाएं लीक की गई हैं।