पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि बागवानी पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकने में अहम भूमिका निभाएगी। युवाओं को बागवानी को अपनाना चाहिए। बागवानी कर आर्थिकी मजबूत करना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री बुधवार को जीआईसी बुल्हाड़ में आयोजित बागवानी गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन, बागवानी और कृषि के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। गोष्ठी के संयोजक सेवानिवृत्त आईआरएस अधिकारी रतन सिह रावत ने कहा कि जौनसार बावर क्षेत्र में बागवानी बढ़ रही है, लेकिन बागवानों को जानकारी का अभाव है। इसी को देखते हुए सेब की गोष्ठी का आयोजन किया गया है। इस मौके पर विजेन्द्र, पूजा गौड़, आलोक सत्याल, पूर्व राज्यमंत्री प्रताप सिंह रावत, वीरेन्द्र चौहान, जगत राम नौटियाल, विजय रावत आदि मौजूद रहे।
जमीन में आवश्यक तत्वों को बनाए रखें किसान : विशेषज्ञ
हिमाचल के नंदपुर से आए बागवान और सेब विशेषज्ञ बलबीर छाजटा, रानीखेत के गोपाल दत्त उप्रेती, पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने बागवानों को सेब उत्पादन के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि सेब के बगीचों में सेब की गुणवत्ता को बढ़ाने एवं बनाए रखने के लिए किसान जमीन का परीक्षण करके उसमें आवश्यक तत्वों को बनाए रखें। ग्रामीण क्षेत्रों में बागवानी विकसित करने के लिए सरकार को बागवानों की सुविधा के लिए मृदा परीक्षण लैब स्थापित करनी चाहिए। उन्होंने बागवानों को सरकारी अनुदान का लाभ उठाने की अपील की। पुराने बगीचों में गुणवत्ता सुधार एवं उनके नवीनीकरण के विषय में बताया। पौधों में लगने वाली विभिन्न बीमारियों व उनके रोकथाम के तरीके भी बताए।