बदहाल पड़ी साहिया पाटन स्थित वन चौकी।
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जंगल की रखवाली के लिए साहिया पाटन और कोठा-तारली गांव में बनाई गई वन चौकियां इन दिनों अपनी बदहाल पर आंसू बहा रही है। देखभाल के अभाव में वन चौकी पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो गई है। जगह-जगह झाड़ियां उग आई है। लिहाजा कोई भी वन कर्मचारी यहां पर रुकना पसंद नहीं करता। ऐसे में रात के समय जंगल की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से रामभरोसे होती है। 1960 में साहिया पाटन और कोठा तालरी गांव में जंगल की रखवाली के लिए वन चौकी का निर्माण किया गया था। आरक्षित वन क्षेत्र होने के कारण दोनों गांव से सटे जंगलों में बेशकीमती प्रकाष्ठ के साथ ही जड़ी बूटी और गुलदार जैसे संरक्षित प्रजाति के वन्य जीव भी हैं। लेकिन समय से विभाग ने इन वन चौकियों की मरम्मत के लिए ढेला तक खर्च नहीं किया है। जिस कारण अब ये वन चौकियां पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो गई हैं। इनमें दरवाजे और खिड़कियां भी नहीं है। ऐसे में रात के समय रुकने की व्यवस्था न होने के कारण इन जंगल की रखवाली का जिम्मा संभालने वाले वन बीट अधिकारी रोजाना कालसी से अप-डाउन करते हैं। बमराड़ ग्राम पंचायत के निवर्तमान ग्राम प्रधान रणवीर सिंह चौहान, साहिया नेवी के प्रधान मोहन लाल शर्मा, सुरेंद्र सिंह चौहान, अतर सिंह खन्ना आदि का कहना है कि शिकायत के बाद भी वन विभाग बदहाल चौकियों की सुध नहीं ले रहा है। आगजनी की घटना होने पर ग्रामीणों को अपने स्तर पर आग पर काबू पाना पड़ता है। वहीं डीएफओ दीपचंद आर्य ने बताया कि क्षतिग्रस्त वन चौकियों का प्रस्ताव बना शासन को भेज दिया गया है। बजट स्वीकृत होते ही वन चौकियों की मरम्मत कराई जाएगी।