उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में ‘फॉरेंसिक साइंस की आपराधिक विवेचना में भूमिका’ पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एवं फॉरेंसिक साइंस संस्थान लखनऊ के निदेशक डाॅ. जीके गोस्वामी ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस पर आधारित साक्ष्य न केवल मुख्य साक्ष्य को बल देते हैं बल्कि निष्पक्ष और वैज्ञानिक तौर पर परखे होते हैं। कहा कि फॉरेंसिक साइंस एक शक्तिशाली हथियार है जो कि अपराध और निर्दोषता दोनों को साबित करने में सक्षम है।
सेमिनार में विश्वविद्यालय कुलाधिपति जितेंद्र जोशी ने स्मृति चिह्न देकर मुख्य अतिथि का स्वागत किया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि डा. गोस्वामी ने पुलिस सेवा के अनुभवों को साझा करते हुए फॉरेंसिक साइंस के औचित्य व महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि हर विवाद की इमारत अन्याय की बुनियाद पर स्थापित होती है जबकि फॉरेंसिक साइंस के मूल में न्याय होता है। आम आदमी कोर्ट से निष्पक्ष सुनवाई की अपेक्षा करता है लेकिन वास्तविकता यह है कि निष्पक्ष विवेचना के बगैर निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है। केवल मौखिक गवाही पर आधारित
फैसला न्याय की गारंटी नहीं होता। लॉ कॉलेज के डीन एवं विश्वविद्यालय उपकुलपति प्रो राजेश बहुगुणा ने कहा कि अब
भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता में सात वर्ष से अधिक सजा के मामलों में फॉरेंसिक विवेचना को आवश्यक कर दिया है। इसके चलते फॉरेंसिक साइंस का महत्व बढ़ा है। कुलपति प्रो. धर्म बुद्धि ने फॉरेंसिक साइंस संस्थान के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर विवि के कार्यकारी निदेशक डाॅ. अभिषेक जोशी, प्राचार्या डाॅ. पूनम रावत, संकायध्यक्ष डाॅ. राधेश्याम झा, अभिरंजन दीक्षित, डाॅ. लक्ष्मी प्रिया विन्जामूरी, अमित चौधरी, डाॅ. रमाकांत त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।