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सात माह पहले परिवार से बिछड़ा पांच वर्षीय अरशद शुक्रवार अपने परिजनों से मिल गया। वह आठ मई 2023 को रूड़की में मिला था। उस समय वह अपना नाम याद करने में असमर्थ था। उसे राजकीय शिशु निकेतन भेजा गया, जहां उसे काउंसलर से परामर्श मिला। शिशु निकेतन के कर्मचारियों और परामर्शदाताओं की सहायता से उसने धीरे-धीरे अन्य बच्चों के साथ घुला-मिला और अपने बारे में जानकारी देनी शुरू की।I
Iअरशद ने बताया था कि उसके भाई का नाम समीर और बहन का नाम सोफिया है। उसके पिता नहीं हैं। दादा का नाम अनीश है। वह शादियों में खाना बनाने का काम करते हैं। यह भी बताया कि वह इसी शहर में कहीं का रहने वाला और उनका एक घर नाले के किनारे है। यह जानकारी जिलाधिकारी के निर्देश पर अखबार की विज्ञप्ति के माध्यम से साझा की गई। 23 नवंबर को स्थिति बदल गई। जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट ने बच्चों के अधिकारों पर कार्य करने वाले स्थानीय वकील रिजवान अली से सहायता मांगी। रिजवान ने गैर सरकारी संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से बालक का विवरण और फोटो का प्रचार कराया। इसके बाद आजाद कॉलोनी निवासी अरशद के परिवार को अगले ही दिन 24 नवंबर को पता चल गया। बालक के दस्तावेजों और पहचान की सत्यापन प्रक्रिया के बाद बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) व जिला प्रशासन देहरादून के समक्ष बालक को परिवारजनों के हवाले किया गया।I