सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर एक युवक से 99 लाख रुपये ठग लिए गए। पांच आरोपियों ने यह रकम युवक को जेई या सहायक वन संरक्षक के पद पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर हासिल की थी। युवक ने रिश्तेदारों से रकम उधार लेकर जालसाजों को दे दी लेकिन नौकरी नहीं लगी। एक आरोपी ने आयोग में रहे अपने मामा का भी जिक्र किया था। मामले में दो सगे भाइयों से एसटीएफ भी पिछले दिनों पेपर लीक के शक में पूछताछ कर चुकी है।
शिकायत सिद्धेश्वर एनक्लेव, केदारपुरम के रहने वाले धर्मेंद्र सिंह रावत ने की है। धर्मेंद्र वर्ष 2017 में दिल्ली के एक संस्थान से सिविल सेवा परीक्षा के लिए कोचिंग कर रहा था। इस दौरान उसकी पहचान राजीव प्रताप नाम के युवक से हुई। राजीव ने कहा था कि उसने उत्तराखंड पीसीएस की परीक्षा अपने मामा जयदेव शाह को पैसे देकर पास की है। जयदेव शाह को उन्होंने आयोग का पूर्व कर्मचारी बताया था। कुछ दिन बाद राजीव ने अपने भाई आलोक प्रताप से भी मुलाकात कराई।
धर्मेंद्र को बताया गया कि उसका चयन वे जेई या सहायक वन संरक्षक के पद पर करा सकते हैं। इसके लिए खर्चा लगेगा। धर्मेंद्र ने शुरुआत में उन्हें दो लाख रुपये दे दिए। इसके बाद लगातार उससे पैसे लिए जा रहे थे। कुल मिलाकर धर्मेंद्र ने अलग-अलग खातों में 99 लाख रुपये जमा करा दिए। ज्यादातर रकम उसने उत्तरकाशी में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से उधार ली है। यह रुपये उसने राजीव प्रताप, आलोक प्रताप, लोकेंद्र, राजपाल और राजेंद्र के खाते में जमा कराई है। एसओ नेहरू कॉलोनी लोकेंद्र बहुगुणा ने बताया कि इन सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।