सेटेलाइट इमेजरी के आधार पर भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग (एफएसआई) ने जंगल में आग का अलर्ट जारी किया तो वन विभाग भी चौंकन्ना हो गया। वन मुख्यालय की ओर से डिविजनों में अलर्ट के साथ ही मौके पर कर्मचारी भेजे गए तो यह आग धान की फसल कटाई के बाद पराली में लगी मिली। वन विभाग ने दावा किया है कि फिलहाल प्रदेश में जंगल में आग की कोई घटना नहीं हुई है।
हालांकि एफएसआई के इस अलर्ट के बाद वन विभाग ने मुख्यालय में स्थित कंट्रोल रूम को फिर से बहाल कर दिया है। यहां दो चरणों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। वन विभाग ने बीते वर्षों में शीतकाल में आग की घटनाओं को देखते हुए पुख्ता तैयारी का दावा किया है। मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन निशांत वर्मा ने बताया कि जलवायु परिवर्तन व शीतकाल में कम वर्षा के कारण विगत वर्षों में कुछ क्षेत्रों में वनाग्नि की घटनाएं हुई हैं।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष अभी तक जंगल में आग की कोई घटना सामने नहीं आई है। एफएसआइ की ओर से बीते एक नवंबर से सेटेलाइट-सेंसर के माध्यम से फायर अलर्ट वन विभाग को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पहले दिन प्रदेश में दो स्थानों पर आग को लेकर फायर अलर्ट मिला था। इस पर मुख्यालय से प्रभागीय वनाधिकारियों को तत्काल स्थलीय सत्यापन के लिए भेजा गया।
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तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी और तराई पश्चिमी वन प्रभाग रामनगर के वनाधिकारियों ने स्थलीय सत्यापन कर अवगत कराया कि वर्तमान में वन क्षेत्रों के समीप स्थित कृषि भूमि में किसान गेहूं की बुआई के लिए धान की पराली में आग लगा रहे हैं। इसी आग के कारण फायर अलर्ट प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि बीते वर्षों के अनुभवों को देखते हुए वन विभाग शीतकाल में भी वनों की आगे को लेकर अलर्ट मोड में है।