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Dehradun News: दवाओं का जखीरा मिलने पर जागा था विभाग, अब फिर सो गया

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Iमेडिकल स्टोर संचालकों की मनमानी पर फिर नहीं हुई कोई कार्रवाईI
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Iबिना फार्मासिस्ट के अब भी संचालित हो रहे सैकड़ों मेडिकल स्टोरI
मेडिकल स्टोर पर प्रतिबंधित दवाओं का मिलना कोई नई बात नहीं है। गत मई में जब एक दुकान से हजारों कैप्सूल और गोलियां मिलीं तो एकाएक ड्रग विभाग की नींद टूट गई। अगले दो दिन अभियान चलाया और मेडिकल स्टोर की चेकिंग की। बिना फार्मासिस्ट के चल रहे मेडिकल स्टोर बंद कराए। भविष्य में कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके बाद फिर से सो गया। चोरी छिपे इस तरह की दवाओं की बिक्री की सूचना पर अब कानून व्यवस्था के लिहाज से पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी।

दरअसल, सात मई को प्रेमनगर पुलिस ने सुद्धोवाला में एक मेडिकल स्टोर से 68 हजार प्रतिबंधित कैप्सूल और 12 हजार गोलियां बरामद की थीं। इन दवाओं को मेडिकल स्टोर संचालक आसपास के क्षेत्र के छात्रों और नशा करने वाले लोगों को ऊंचे दामों में बेचते थे। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई के बाद ड्रग विभाग ने भी शहरभर के मेडिकल स्टोर की चेकिंग की। दवाओं का स्टॉक चेक हुआ, लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। अलबत्ता 15 मेडिकल स्टोर ऐसे बंद कराए गए, जिनमें फार्मासिस्ट मौजूद नहीं थे। ये बिना किसी वैध लाइसेंस के चल रहे थे।
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इस कार्रवाई के बाद ड्रग विभाग ने चेतावनी थी कि यदि कोई अनियमितताएं मिलीं तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके बाद से अब तक कोई चेकिंग या कार्रवाई नहीं हुई। चोरी छिपे इस तरह की दवाओं की बिक्री की जाती है। इसी तरह की सूचनाएं पुलिस को लगातार मिलती हैं। वर्तमान में नशा मुक्त देवभूमि अभियान के तहत पुलिस ने छापे की कार्रवाई शुरू कर दी। सभी 21 थाना क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर चेक हुए और एकाएक बड़ी कार्रवाई कर दी। अब देखने वाली बात ये है कि ड्रग विभाग को जब इसकी रिपोर्ट जाएगी तो आगे क्या कार्रवाई होगी। ड्रग विभाग की नींद टूटेगी या फिर यूं ही चिर निद्रा में लीन रहेगा।


I10 रुपये की गोलियां बिकती हैं 100 रुपये मेंI
जो दवाएं अक्सर पुलिस पकड़ती है उन पर अधिकतम खुदरा मूल्य 10 रुपये तक होता है। कुछ मेडिकल स्टोर संचालक अधिक लाभ कमाने के चक्कर में इन दवाओं को नशे के आदी लोगों को बेचते हैं। उनसे इनका दाम 100 रुपये तक वसूला जाता है। पिछले हुई कार्रवाई में इस बात का खुलासा आरोपियों ने किया था।
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Iलाइसेंस लेकर मासिक देते हैं रकमI
फार्मासिस्ट की डिग्री पर ही मेडिकल स्टोर का लाइसेंस दिया जाता है। कई बार यह देखने में आता है कि कुछ लोग लाइसेंस तो किसी डिग्री धारक के नाम पर ही लेते हैं, लेकिन इसका संचालन खुद करते हैं। डिग्री धारक को हर महीने कुछ हजार रुपये दे दिए जाते हैं। हालांकि, इस कार्रवाई में यह बात है या नहीं इसकी जानकारी नहीं है।
Iमुझे अभी रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है कि पुलिस ने किन-किन बातों को ध्यान में रखकर चेकिंग की। I
I-ताजबर सिंह नेगी, ड्रग कंट्रोलरI
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