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हीमोफीलिया का समय पर इलाज न होने से दिव्यांगता की संभावना

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हीमोफीलिया सोसाइटी देहरादून चैप्टर की ओर से वार्षिक आमसभा और मेडिकल एजुकेशन कार्यक्रम इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स में किया गया, जिसमें बीमारी से जुड़े तमाम पहलुओं पर चर्चा की गई। साथ ही शिविर में 250 से अधिक हीमोफीलिया पीड़ितों की जांच की गई।
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एम्स ऋषिकेश के डॉ. उत्तमनाथ और डॉ. आवृत्ति ने बताया कि हीमोफीलिया ऐसी बीमारी है, जिसमें पीड़ित मरीज के अंदरूनी चोट लगने पर खून बहता रहता है और यदि समय रहते इलाज न कराया जाए तो मरीज के दिव्यांग होने की संभावना रहती है। बताया कि बीमारी का इलाज संभव है। यदि हीमोफीलिया के लक्षण दिखाई दें तो तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराने के साथ ही इलाज कराना चाहिए।
चिकित्सा शिविर में जौलीग्रांट अस्पताल की डॉ. मानसी काला की अगुवाई में टीम ने 250 से अधिक हीमोफीलिया मरीजों की जांच करने के साथ ही बीमारी से बचाव की जानकारी दी। इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग की नोडल अधिकारी डॉ. ज्योति पाठक, हीमोफीलिया सोसाइटी दून चैप्टर के प्रधान डॉ. जेपी शर्मा, सचिव दीपक सिंघल, कोषाध्यक्ष संजीव गोयल, प्रवीण जोशी, हृदयांश, बसंत गुप्ता, शीतल मंडोली, पुष्पा जोशी, रवि मेहता आदि मौजूद थे। मा.सि.रि.
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