उप जिला अस्पताल में इमरजेंसी सेवा एक छोटे से कमरे में संचालित की जा रही है। कमरे में दो बेंच के ऊपर मरीजों का उपचार किया जा रहा है। अगर कोई घायल मरीज आ जाए तो पहले से उपचार करवा रहे मरीज को बेंच से हटाना पड़ता है। मरीज का उपचार कुर्सी या स्टूल पर बैठाकर किया जाता है।
उप जिला अस्पताल को जौनसार बावर क्षेत्र की हेल्थ लाइफलाइन कहा जाता है। चकराता, साहिया, कालसी के सरकारी अस्पतालों से यहां गंभीर मरीज रेफर किए जाते हैं। यहां जौनसार बावर, सीमांत उत्तरकाशी, टिहरी, हिमाचल प्रदेश और उत्तरप्रदेश तक के घायल और मरीज इमरजेंसी में उपचार के लिए आते हैं। लेकिन अस्पताल की इमरजेंसी सेवा स्वयं आईसीयू है।
अस्पताल के भूतल में एक छोटे से कमरे में इमरजेंसी रूम है। यहां मरीजों के उपचार के लिए बेड नहीं है। केवल दो बेंच है, जिनपर मरीज का उपचार किया जाता है। अगर किसी मरीज को ड्रिप लग रही है और अचानक कोई दुर्घटनाग्रस्त या गंभीर बीमार आ जाए तो पहले मरीज को हटाना पड़ता है।
जगह के अभाव के इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक और कर्मचारी मरीजों को स्टूल में बैठे-बैठे ड्रिप लगाने, मरहम पट्टी करने या अन्य उपचार देने का कार्य करते हैं। कई बार बड़ी संख्या में घायल आ जाए तो मरीजों को खड़े-खड़े भी उपचार देना पड़ता है।
रोजाना आते है 30 से 40 गंभीर मरीज
अस्पताल की ओपीडी करीब 500 से 550 है। वहीं 30 से 40 गंभीर लोग इमरजेंसी में उपचार के लिए आते हैं। इनमें घायल और बीमार दोनों ही शामिल रहते हैं। यहां आए दिन वाहनों की दुर्घटनाएं भी होती है। घायल मरीजों को उपचार के लिए उप जिला अस्पताल ही लाया जाता है।
पैथोलॉजी लैब नए भवन में शिफ्ट होनी है। अगले दो माह में भवन का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। दंत रोग विशेषज्ञ के कक्ष को ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट कर दिया जाएगा। तब इमरजेंसी और दंत रोग विशेषज्ञ के कक्ष को जोड़कर एक इमरजेंसी रूम बनाने की योजना है। - डॉ. विजय सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, उप जिला अस्पताल