आजकल एक पुराने नेता उक्रांद में दोबारा जड़ें तलाशते दिख रहे हैं। एक जमाने में पार्टी के भीतर इनकी तूती बोलती थी।
दूसरे दल का दामन थाम रखा था
दल के कई बार चुनावों में समीकरण बिगाड़ने और बनाने में माहिर यह नेता लंबे समय से अज्ञातवास में है। इस नेता के लिए सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि जिस दूसरे दल का दामन इन्होंने थाम रखा था वहां भी पूछ होना बंद हो गई है।
अब राजनीति सफर के आखिरी दौर में अब अकेलापन सता रहा है तो उनके खास गुर्गे पुराने दुश्मनों से दोस्ती की पींगे बढ़ा रहे हैं।