अशरफ नहीं दे रहा था पैसों का हिसाब
सुहैल ने पुलिस को बताया कि अशरफ नजीबाबाद में इसी तरह की कंपनी चलाता था। उसे वहां नुकसान हुआ तो वह देहरादून चला आया। अशरफ ने भगत सिंह कॉलोनी में एक ऑफिस किराये पर लिया। उसके साथ सुहैल भी काम करने के लिए आ गया। शुरुआत में सुहैल को 10 हजार रुपये प्रतिमाह देने की बात हुई। करीब 200 लोगों के खाते इस कंपनी में खोल दिए गए लेकिन अशरफ, सुहैल को पैसों का हिसाब नहीं बता रहा था। इस पर दोनों के बीच झगड़ा होने लगा। एक माह केवल पांच हजार रुपये सुहैल को दिए गए।
सुहैल ने 21 की रात में ही कर दी थी हत्या
सुहैल, अशरफ से और पैसे लेना चाहता था लेकिन अशरफ ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। 21 दिसंबर को सुहैल कमरे पर गया तो देखा कि अशरफ वहीं मौजूद था। दोनों के बीच झगड़ा हुआ तो अशरफ ने सुहैल को बाहर निकाल दिया। सुहैल को ठंड लगी तो उसने फिर उसे अंदर बुला लिया। रात को ही पैसों के लालच में उसने हत्या की योजना बनाई। अशरफ रात को सो गया। इस पर सुहैल ने वहां से छोटा गैस सिलिंडर उठाया और उसके सिर पर मार दिया। इससे अशरफ की मौत हो गई।
नदी में फेंकना चाहता था लाश को, नहीं उठा पाया बोरा
हत्या के बाद सुहैल ने नायलॉन की रस्सी से अशरफ के पैर बांध दिए और शव को रजाई में लपेटकर बोरे में बंद कर दिया। वह इस शव को सामने नदी में फेंकना चाहता था लेकिन भारी होने के कारण वह बोरे को नहीं उठा पाया। वह रात में ही कमरा बंद कर चला गया। अगले दिन 22 दिसंबर को वह भगत सिंह कॉलोनी स्थित ऑफिस में गया। वहां का ताला तोड़कर ऑफिस की तलाशी ली लेकिन वहां से भी कुछ नहीं मिला। इसके बाद वह फिर कमरे पर आया और ताला लगाकर बिजनौर चला गया।