फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dehradun News: कॉन्स्ट्रक्शन में इस्तेमाल हो रहा पेयजल, एसटीपी का पानी नदी में छोड़ रहे

विज्ञापन
विज्ञापन
देहरादून। शहर के कई इलाके हैं जहां पीने के लिए पानी नहीं पहुंच रहा है। जिस पेयजल से लोगों की प्यास बुझ सकती है उसे पेड़ों की सिंचाई, कॉन्स्ट्रक्शन, सड़क बनाने और सड़क पर छिड़काव करने में लगाया जा रहा है। इन कार्यों के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का पानी उपयोग में लाया जा सकता है। जबकि, शहर के एसटीपी में पानी ट्रीट करने के बाद बिंदाल और रिस्पना नदी में छोड़ा जा रहा है। इसका कारण बताया गया कि एसटीपी का पानी ले जाने के लिए विभागों के पास अलग से टैंकर ही नहीं हैं।
विज्ञापन


बता दें कि नगर निगम, एमडीडीए और पीडब्ल्यूडी और फायर ब्रिगेड को जब पानी की जरूरत होती है तो तीनों ही संस्थान पेयजल के टैंकर भरवाकर पानी इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए इनके पास कई टैंकर उपलब्ध हैं। वहीं, अगर एसटीपी के पानी का उपयोग करना हो तो इनके पास अलग से कोई टैंकर नहीं है। तीनों संस्थान अपने कार्यों के लिए एसटीपी के पानी के बजाय पेयजल ही उपयोग करते हैं। जबकि, पेयजल बचाकर बढ़ती गर्मी के बीच कई मोहल्लों की प्यास बुझाई जा सकती है।
शहरवासी जल संस्थान को कोस रहे, संस्थान दे रहा लोगों को सीख
शहरवासी जल संस्थान को पेयजल बर्बाद करने को लेकर कोस रहे हैं। लोगों का कहना है कि पानी की कमी की वजह से नए कॉमर्शियल कनेक्शन बंद कर दिए गए हैं। जल संस्थान कह रहा है कि पीने के पानी को किचन, गार्डन में, गाड़ी धोने में न करें। इसके उलट जल संस्थान खुद ही एमडीडीए के साथ मिलकर पेयजल को सड़कों व चौराहों पर लगाए गए पौधों की सिंचाई में इस्तेमाल कर रहा है।
विज्ञापन


-
कारगी जोन स्थित 68 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) एसटीपी के इंचार्ज एमएस भट्ट ने बताया कि यहां पर रोजाना 20 एमएलडी पानी ट्रीट किया जाता है। ट्रीट पानी को बिंदाल नदी में बहा दिया जाता है। वैसे इस पानी का उपयोग पेड़ों की सिंचाई, कॉन्स्ट्रक्शन, सड़क बनाने आदि में किया जा सकता है। यहां पर पानी लेने के लिए नगर निगम या एमडीडीए नहीं आता है। फायर ब्रिगेड भी इस पानी का इस्तेमाल नहीं करता।
-
मेंटेनेंस का कार्य जल संस्थान देख रहा
एमएस भट्ट ने बताया कि यह एसटीपी 2015 में बनाया गया था। इस एसटीपी से कारगी, ब्राह्मणवाला, पटेलनगर, जीएमएस रोड, आईएसबीटी की सीवर लाइनों को जोड़ा गया है। यह एसटीपी उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवेलपमेंट इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम (यूयूएसडीआईपी) की ओर से बनाया गया है लेकिन इसके मेंटेनेंस का कार्य उत्तराखंड जल संस्थान करता है।

अन्य दो एसटीपी का पानी रिस्पना में छोड़ रहे
मोथरोवाला में भी दो एसटीपी बने हैं। इनकी क्षमता 20 एमएलडी है। इन दोनों का पानी रिस्पना नदी में छोड़ा जा रहा है। यहां के शुद्ध होने वाले पानी को भी उपयोग में नहीं लाया जा रहा है।
-
एसटीपी के पानी को लेकर शंका होती है
लोगों के मन में यह शंका होती है कि एसटीपी का पानी उपयोग के लिए ठीक नहीं है क्योंकि यह सीवर का पानी ही ट्रीट किया जाता है। इंचार्ज ने बताया कि एसटीपी में पानी ट्रीट होकर शुद्ध हो जाता है जिसका विभिन्न कार्यों में इसका उपयोग किया जा सकता है।

उत्तराखंड जल संस्थान के महाप्रबंधक डीके सिंह ने बताया कि एसटीपी का पानी इस्तेमाल करने के लिए रॉ वाटर टैंकर होते हैं। हालांकि, ये टैंकर विभाग के पास नहीं हैं। इस संबंध में बात की जाएगी कि पेयजल की जगह पर एसटीपी का पानी इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए प्लान तैयार किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें