श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि शालीनतापूवर्क व संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मंदिरों में साइन बोर्ड लगाए गए हैं। श्रद्धालुओं के शरीर 80 फीसदी तक ढके होने चाहिए।
कहा कि देश के अधिकांश मंदिर चाहे वह संतों के हो या फिर अन्य कमेटी, सरकार के ट्रस्ट के अधीन हो सभी ने इस फैसले का स्वागत किया है। बताया कि दक्षिण भारत के कई मंदिरों में ड्रेस कोड पहले से लागू है। उत्तराखंड तीर्थों का प्रदेश है यहां भी इसकी जरूरत थी।