दहेज उत्पीड़न के दो अलग-अलग मामलों में पति समेत ससुरालियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। महिला हेल्पलाइन में काउंसिलिंग के बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
महेशपुरा मदर कॉलोनी निवासी रईस मुंशी ने कोतवाली में कहा कि उसने अपनी बेटी रहमत जहां का निकाह देहरादून के डाकपत्थर निवासी नौशाद आलम के साथ किया था। विवाह के समय उसने लाखों की कीमत के उपहार, आभूषण और 3.71 लाख रुपये मूल्य की कार दी थी। आरोप है कि दहेज में स्कार्पियों कार की मांग को लेकर रहमत जहां के ससुरालियों ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
6 जुलाई 2018 को बेटा खालिद और भतीजा इस्लाम बहन की ससुराल पहुंचे तो ससुरालियों ने स्कॉर्पियो की मांग को लेकर रहमत को दोनों भाइयों के साथ मायके भेज दिया। आरोप है कि 14 नवंबर 2018 को रहमत के पति नौशाद, सास तारा बेगम, देवर असलम, हैदर, ननद रेशमा, मुशाहिद और फिरदौस आदि एकराय होकर उसके घर में घुस आए। इन लोगों ने मांग पूरी न होने पर रहमत को ससुराल ले जाने से इनकार कर दिया। तहरीर के आधार पर पुलिस ने पति समेत सातों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
उधर, बाजपुर निवासी विवाहिता ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है कि 24 जून 2010 को उसका विवाह दिनेशपुर के ग्राम मोतीपुर निवासी जुगल मिस्त्री के साथ हुआ था। शादी के कुछ दिनों बाद ही दहेज में एक लाख रुपये और बाइक की मांग को लेकर पति व ससुरालियों ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। आरोप है कि पति ने उसके साथ अनैतिक कृत्य भी किया। 26 अक्तूबर 2014 को उसने एक पुत्री को जन्म दिया।
इसके बाद पति व ससुरालियों का व्यवहार उसके प्रति और क्रूर हो गया। कुछ दिन बाद पति उसे छोड़कर चला गया। तीन माह बाद लौटकर उसने फिर मारपीट की। जनवरी 2018 में तलाक के लिए दबाव बनाते हुए पति व ससुरालियों ने उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया। तहरीर के आधार पर पुलिस ने पीड़िता के पति जुगल, सास अर्चना, ससुर गौर व देवर गोविंद के खिलाफ धारा 377 व दहेज अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।