घटना में करते हैं वर्चुअल फोन, पोर्टेबल सिग्नल जैमर का इस्तेमालI
सुबोध गिरोह लूट की घटनाओं को बड़े शातिराना तरीके से अंजाम देता है। गिरोह के सदस्य घटना में वर्चुअल फोन और पोर्टेबल सिग्नल जैमर का इस्तेमाल करते हैं। जैमर के कारण घटना स्थल के आसपास फोन काम नहीं करते हैं। जबकि वर्चुअल फोन के माध्यम से गैंग के सदस्यों का लोकेशन ट्रेस कर पाना मुश्किल हो जाता है। बिहार से गिरफ्तार विशाल यह सामान गैंग के सदस्यों को उपलब्ध करवाता था। कटनी (मध्य प्रदेश) तथा सांगली (वेस्ट बंगाल) की घटनाओं में भी आरोपियों ने पोर्टेबल सिग्नल जैमर का इस्तेमाल किया था।
ओएलएक्स या चोरी गाड़ियों का करते हैं घटना में इस्तेमालI
सुबोध गैंग के सदस्य घटनाओं को करने के लिए या तो चोरी की गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं या फर्जी आईडी पर ओएलक्स से गाड़ियां खरीद कर उन गाड़ियों से घटनाओं का अंजाम देते हैं। देहरादून में आरोपियों ने चोरी की वाहनों का इस्तेमाल किया गया था। जबकि लातूर व कटनी में ओएलएक्स के माध्यम से फर्जी आईडी पर गाड़ियां खरीदी गईं थीं।
फर्जी आईडी पर पश्चिम बंगाल और बिहार से खरीदते हैं सिमI
घटनाओं के दौरान आपस में संपर्क करने के लिए गैंग के सदस्य पश्चिम बंगाल तथा बिहार से ही फर्जी आईडी पर सिम खरीदते हैं। जिन्हे घटना के बाद नष्ट कर दिया जाता है।