फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नवजात की मौत के लिए डॉक्टर और अस्पताल को बताया जिम्मेवार

विज्ञापन
विज्ञापन
नवजात की मौत पर अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज उप्रेती से लिखित शिकायत की है। सीएमओ ने एसीएमओ को मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन

डांडा लंखौड गुजराड़ा मानसिंह निवासी विनित यादव ने सीएमओ को की शिकायत में बताया कि उनकी बहन मोनिका यादव का वैश्य नर्सिंग होम, सेवक आश्रम रोड में इलाज चल रहा था। 25 अक्तूबर सुबह प्रसव पीड़ा होने पर मोनिका को अस्पताल में भर्ती कराया गया। गायनेकोलॉजिस्ट डिलीवरी में देरी करती रहीं। बच्चे का जन्म शाम चार बजे हुआ। ऑक्सीजन सही तरीके से नहीं मिलने के कारण उसकी हाइपॉक्सिया, फेफड़ों में संक्रमण, मल्टीपल ऑर्गन डैमेज जैसी स्थिति हो गई। इलाज के दौरान भी 11 दिन तक निक्कू वार्ड में रखा गया। आरोप लगाया कि इसमें भी लापरवाही बरती गई। जिस कारण बच्चे की प्लेटलेट्स गिरती रहीं और उसे इंटरनल ब्लीडिंग शुरू हो गई।
तीन नवंबर को दोपहर बाद तीन बजे सीबीसी कराया गया। निक्कू वार्ड में डॉक्टर के न होने के कारण उस रिपोर्ट की जांच रात 11 बजे हुई। रात 11.30 बजे परिजनों को प्लेटलेट्स का इंतजाम करने को कहा गया। बच्चे की हालत बिगड़ती गई और इंटरनल ब्लीडिंग के कारण उसकी मृत्यु हो गई।
विज्ञापन

वहीं, वैश्य नर्सिंग होम के निदेशक डॉ. विपिन वैश्य का कहना है कि शिशु का समुचित विकास नहीं हुआ था। उसकी स्थिति गंभीर थी और वह वेंटिलेटर पर था। उपचार में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं की गई। जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स भी चढ़ाई गईं लेकिन बहुत प्रयास के बाद भी बच्चे को नहीं बचाया जा सका। मैसिव पल्मनरी हेमरेज के कारण उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें